शनिवार, 12 दिसंबर 2009

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन : समीर लाल ‘समीर’ का व्यंग्य - जाने क्यूँ, अखबार देखता हूँ!!

rachanakar-vyangya

(प्रविष्टि क्रमांक - 29)

(महत्वपूर्ण सूचना : प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2009 निकट ही है. अत: अपने व्यंग्य जल्द से जल्द प्रतियोगिता के लिए भेजें. व्यंग्य हेतु नियम व अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://rachanakar.blogspot.com/2009/08/blog-post_18.html देखें)

 

टेलर मास्टर, ये मेरा पुराना फुल पैण्ट है, इसमे से दोनों बच्चों की हाफ पैण्ट निकल जायेगी क्या?

अरे सर, कैसी बात कर रहे हैं?

जल्दीबाजी में फैसला मत लेना, आराम से सोच विचार कर बताओ. पहले भी औरों के टेलर ऐसे निकाल चुके हैं.

हाफ पैण्ट तो निकल आयेंगी मगर हुक, बटन और जिप तो एक ही है.

ओह, वो तो मैने सोचा ही नहीं. उनके टेलर ने न जाने कैसे निकाली होगी?

एक काम करो-छोटे की बिना जिप और बिना हुक वाली नाड़े की बना दो..दोनों खुश हो जायेंगे.

जी, जैसा आदेश. काम शुरु करता हूँ.

अखबार देखा-खबर है कि आन्ध्र प्रदेश से तैलंगाना अलग कर के नया राज्य बनाये जाने का प्रस्ताव है. सुना है कि आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य बनाए जाने का विरोध कर रहे विधायकों और सांसदों को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आश्वासन देते हुए कहा कि अभी जल्दबाजी में कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा।

अभी तो बहुत सी फुल पैण्ट हैं, जैसे जैसे पुरानी होती जायेंगी..

रास्ता तो मिल ही गया है.

चलते चलते:

कुछ हादसे हो जाते हैं मेरे साथ..
समझ ही नहीं पाता मैं जज्बात..

-जाने क्यूँ अखबार पढ़ता हूँ मैं...

-समीर लाल ’समीर’

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