शनिवार, 19 दिसंबर 2009

पवन शर्मा अजीज की ग़ज़ल

 Pawan sharma Bathida (WinCE)

ग़ज़ल
कुछ बोझ हैं ऐसे जो उठाए नहीं जाते
कुछ जख्म हैं ऐसे जो दिखाए नहीं जाते।

कुछ दर्द जो तुमने दिए रो-रो के धो डाले
कुछ दाग हैं ऐसे जो मिटाए नहीं जाते।

अपने ही बेवफा हो तो कोई क्या करे
गैरों को भी यूं जहर पिलाए नहीं जाते।

कुछ देर तो जलने दिया होता मेरा चिराग
बेवक्त तो यूं दीये भी बुझाए नहीं जाते।

जीना मेरा दुश्वार हुआ सनम तेरे बगैर
अब बोझ जिन्दगी के उठाए नहीं जाते।

जाकर खुदा के सामने मैं क्या जवाब दूंगा
उससे तो कोई राज छुपाए नहीं जाते।

अजीज को दिल से निकाल फेंकने वाले तुम
याद इस कदर आते हो कि भुलाए नहीं जाते।

-डॉ.पवन शर्मा ‘अजीज’
शर्मा क्लिनिक,-
4॰ फुट रोड, चंदसर बस्ती,
बीबी वाला रोड, भठिण्डा, पंजाब
मो. ॰921751॰98??
प्रेषक: दीनदयाल शर्मा. हनुमानगढ़ जं., राजस्थान. 

6 blogger-facebook:

  1. इस गज़ल को 4-5 बार पढा एक एक शेर दिल मे उतर गया मुझे समझ नहीं आ रहा कि किस किस शेर की तारीफ करूँ। पूरी गज़ल लाजवाब है । डा़ पवन शर्मा जी को बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ीं निशब्द और मौन हो गयी हूँ

    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया गजल प्रेषित की है।आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  4. जाकर खुदा के सामने मैं क्या जवाब दूंगा
    उससे तो कोई राज छुपाए नहीं जाते।

    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना, हर पंक्ति लाजवाब, बहुत-बहुत बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेनामी8:14 pm

    tukbandi hai keval
    bekar hai

    उत्तर देंहटाएं

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