रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

एम. शाहुल हमीद की कविता : अपनी राह

clip_image002

अपनी राह

बेखबर अनजान थे

हम अपनी राह पर ,

चमक कहीं सी आयी,

अचानक अपनी राह पर,

बना वह बन्‍दी हमें,

कच्‍चे डोर व अपनी राह पर,

जिसे देख मचे,

कोलाहल अपनी राह पर,

बने सभी दुश्‍मन हमारे,

अपनी राह पर,

थी खबर इसकी हमें,

मगर हुए हम खबर अपनी राह पर,

बढ़े हम आगे ही आगे,

कभी फिसलते, गिरते, बिलखते, अपनी राह पर,

उस तक पहुंच गये,

जहाँ थी ना दूजी राह अपनी राह पर,

बस चमक ही चमक थी,

सत्‍य की राह पर।

---

डॉ. एम. शाहुल हमीद,

प्रवक्‍ता, हिन्‍दी विभाग,

मनोंमणियम सुन्‍दरनार विश्‍वविद्यालय,

तिरूनेलवेलि

तमिलनाडु

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][random][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][random][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][random][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget