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सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कविताएँ

surendera -106

लम्पट

अरे ये लम्पट!

क्यों तू गा रहा है अग्निपथ-अग्निपथ!

अपने स्वार्थ के लिए

किसी का भी पाता सान्निध्य

जिसने दी जड़ों को खाद और पानी

उसी के साथ कर ली बेईमानी

मैं और मेरे बच्चों के लिए

करता रहा मेल-जोल

धन के लिए ही करता है

नाप तोल कर गोल

मंगल के अमंगल से बचने

बकरी के बच्चे सा

होने वाली बहू का कान पकड़

करता मन्दिरों की नाप जोख

काल के ताण्डव का

हो न अपने परिवार पर प्रकोप

देश, समाज, शहर के लिए

क्या किया बता सके यह सवाल?

अपने को कृषक बताकर लूटना चाहता

गरीबों का माल

कब चलाया है हल?

फिर क्यों लेना चाहते झूठा प्रतिफल!

छूट

जो जहां काबिज ह

उसे खुली छूट है

मर्यादाओं का खूब उल्लंघन करे

भावनाओं को जमके छले

लीपापोती की हास्यास्पद हरकत करे

आपकी असुविधा पर सुचिंतित दिखे

मतलब सिद्ध हुए बिन एक न सुने

जिस पर किसी का अंकुश नहीं

न किसी का चाबुक कर सके काबू

आजाद भारत का है वह बाबू!

इंतजार

द्वार पर दर्द की यादें है

दिखने और होने के बीच

घुंघलका छंटने का इंतजार है

बिगुल फूंकने के लिए जुगत जारी

संकेतों में कर ली पूरी तैयारी

अपने-अपने दर्द और समस्याओं की फेहरिस्त लेकर

अपने सामने आते-जाते रहते हैं

उपेक्षित क्या यह समझ नहीं पाते हैं

भीनी-भीनी खुशबू में उलझकर

सजी-धजी रह जाती है तैयारी।

शिद्दत

चिलचिलाती धूप में

तपती हुई तारकोल की सड़क पर

हम सवारियां ही नहीं मजबूरियां भी

कड़कड़ाती सर्दी में, मूसलाधार वर्षा में

बड़ी शिद्दत से ढो रहे हैं

आप रहे कूलरों-एअर कंडीशनरों में

हमें फर्क नहीं पड़ता है

बेरोजगारी और बेकारी में

पेट की आग बुझाने के लिए

कुछ न कुछ श्रम तो कर रहे हैं

सिर छुपाने की चिंता नहीं

हमने रिक्शे को बना लिया घर

जनपथ से राजपथ लगाए तीन चक्कर

नहीं थे पैसे अन्यथा खरीद लेता थ्रीव्हीलर

पर मुझे शहर से क्यों खदेड़ रहे।

हम भी मानव हैं

क्यों जानवर बना रहे हैं।

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

राजसदन 120/132 बेलदारी लेन, लालबाग, लखनऊ

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बहुत सुन्दर और जोरदार रचनएं प्रेषित की है। सब से पहली रचना"लम्पट" एक कड़वी सच्चाई को ब्यान करती रचना है।बहुत अच्छी लगी सभी रचनाएं आभार।

badhaai ho surendraji !

aapki kavitaayen bhi aapke naam ki bhaanti aagney aur urjasvit hain

abhinandan !

सुंदर प्रस्तुति बहुत बेहतरीन रचना गंभीर भाव लिए हुए

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

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