20 जनवरी 2010

रचनाकार व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन – परिणाम

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रचनाकार द्वारा पिछले वर्ष अगस्त-09 से दिसम्बर-09 के दौरान व्यंग्य लेखन पुरस्कार का आयोजन किया गया था. तदनुसार निम्न व्यंग्यकारों को पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं -
नक़द राशि -
प्रथम -  शरद तैलंग
द्वितीय - देवेंद्र कुमार पाण्डेय
तृतीय - विनोद साव
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किताबें व हिन्दी फ्रीवेयर यूटिलिटी प्रोग्रामों की डीवीडी -

समीर लाल
गिरीश पंकज
विवेक रंजन श्रीवास्तव
घुघूती बासूती
रविकांत
रमेशचंद्र पाल
अतुल चतुर्वेदी
अशोक गौतम
विभा रानी
एस के पाण्डेय

सभी पुरस्कृतों, आयोजन में भाग लेने वाले व्यंग्यकारों, प्रायोजकों, निर्णायकों व पाठकों को बधाईयाँ, शुभकामनाएँ व आभार.
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निर्णायकों की ओर से...

हिन्दी की प्रमुख साहित्यिक वेब पत्रिकाओं में से एक रचनाकार द्वारा जब हिन्दी व्यंग्य की सीमित समय में प्राप्त प्रविष्टियों के लिये पुरस्कारों की घोषणा हुयी और एक निर्णायक मण्डल घोषित हुआ, तब उसके सदस्यों को दूर दूर तक यह अनुमान नहीं था कि यह काम इतना कठिन है। इसमें कठिनाइयाँ कई तरह की थीं, पहली तो यह कि यह प्रतियोगिता केवल रचनाकार में नेट पर काम करने वालों के लिये थी तथा रचनाकार, सैकड़ों शौकिया और अनुभवी रचनाकारों को स्थान देने वाली वेब पत्रिका है| ब्लाग पर लिखा जाने वाला साहित्य रचनाकारों को बिना किसी सम्पादकीय छलनी के अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता देता है। यही कारण रहा कि इस में अनेक अनुभवी रचनाकारों के साथ साथ हर उम्र और क्षेत्र के ऐसे लोगों के बीच में से चुनाव करना था जो अपने आप को व्यंग्य लेखक के रूप में पहचाने जाने के लिये भी मनमर्ज़ी से लिख देते हैं और उनमें से कई का शिल्प भले ही कमजोर हो किंतु उनमें व्यंग्य विचार होता है। वहीं दूसरी ओर कुछ वरिष्ठ रचनाकारों ने अच्छे शिल्प में कुछ बासे विचारों को ऐसे परोसा जैसे होटल वाले बासी सब्जी-दाल को ताज़ा हरा धनिया और किसा हुआ पनीर भुरक कर बहुत सम्मान से पेश कर देते हैं। तय था कि नियमत नेट लेखन करने वाले ऐसे रचनाकारों का इरादा प्रतियोगिता में उतरने का नहीं था।

    निर्णायकों में से भी कोई एकेडेमिक जगत का खांटी आलोचक नहीं था और होता तो भी अभी तक व्यंग्य के मापने के पैमाने भी तय नहीं हुये हैं। ये सम्मान वैसे तो नेट पर लिखने वाले सबके लिये खुले थे किंतु हिन्दी व्यंग्य के लिये नेट पर दिये जाने वाले सम्भवतः पहले नकद पुरस्कार के रूप में ऐतिहासिक भी थे जिसका उद्देश्य नये लोगों को नेट पर व्यंग्य लेखन के लिये प्रोत्साहित करना भी था। प्रयास ऐसा भी था कि वे अनुभवी लोगों के साथ प्रतियोगिता में सम्मलित होने के बाद सम्मानित हों तो प्रोत्साहन का उछाल और ऊंचा उछाले। नेट की दुनिया अभी सीमित दुनिया है इसलिये सम्मलित परिवार है। दादाजी भी बच्चों के साथ पंजा लड़ाकर हार जाने में बच्चों से ज्यादा खुशी महसूस करते हैं। कुछ कुछ ऐसा ही यहाँ भी है। प्रतियोगिता पहली थी और यह बार बार होगी। हम जानते हैं कि किसी ने भी इसे कुश्ती की तरह दूसरों को चित करने के लिये नहीं लड़ा अपितु मैराथन की तरह किसी पवित्र उद्देश्य के लिये दौड़ में भाग लिया। निर्णायकों के साथ भी कुछ कुछ ऐसा ही था। भविष्य के निर्णायक इसके लिये पैमाने तय करके परखेंगे। इस बीच यह बेहतर ही होगा कि व्यंग्य रचनाकार अपनी रुचि अनुसार अपने प्रिय व्यंग्य लेखकों की रचनाओं को दुबारा से पढ कर और उनकी रचनाओं में अपनी पसन्दगी के गुणों को पहचानने का प्रयास कर उनसे भी आगे निकलने के लिये दौड़ने की कोशिश करें, ताकि नेट लेखन को कमतर नहीं कहा जाये।

15 प्रतिक्रियाएँ.:

  1. सभी पुरस्‍कृत व्‍यंग्‍यकारों को मन से मंगलकामनायें।

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  2. बिना विवाद सब निपट गया, दुगनी बधाई.

    विजेताओं को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं.

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  3. रचनाकार को एक सार्थक आयोजन के लिए और आयोजन में शिद्‌दत से शिरकत करने के लिए सभी व्यंग्यकारों को बधाइयाँ शुभकामनाएँ।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    www.vyangya.blog.co.in
    www.vyangyalok.blogspot.com

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  4. सभी पुरस्कृत व्यंगकारों को बधाई !
    इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिये आपका भी आभार ।

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  5. विजेताओं को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं.

    बहुत सार्थक और सफल आयोजन रहा. आपको साधुवाद!!

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  6. हार्दिक बधाईयां एवम शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  7. ' रचनाकार ’ तथा सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई ।

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  8. सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई, और इस सफल आयोजन के लिए रचनाकार के सभी सदस्यों का आभार .....
    regards

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  9. सभी विजेताओँ को बहुत बहुत बधाइयाँ। अच्छा लगा कोटा के दो रचनाकारों को विजेता सूची में स्थान मिला। शरद तैलंग तो प्रथम रहे। उन्हें और अतुल चतुर्वेदी को खास बधाई अपने शहर से...

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  10. सभी पुरस्कृत व्यंगकारों को बधाई

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  11. सभी पुरस्‍कृत व्यंग्य लेखकों को बधाई

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  12. सभी विजेताओं को बहुत-बहुत बधाइयाँ व शुभकामनाएं.'रचनाकार’का भी आभार.
    सुधीर सक्सेना'सुधि'
    जयपुर

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  13. मै भी सेवक हूं हिन्दी का तुम भी सेवक हो हिन्दी के
    सम्मान नही है यह मेरा सम्मान तो है यह हिन्दी का
    इसी विनत भाव से

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