मंगलवार, 2 मार्च 2010

आरसी चौहान की कविताएँ – फूल बेचती लड़की

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फूल बेचती लड़की
पता नहीं कब फूल की तरह
खिल गयी
फूल खरीदने वाले
अब उसे दोहरी नजर से देखते हैं
और पूछते हैं
बहुत देर तक
हर फूल की विशेषता
महसूसते हैं
उसके भीतर तक
सभी फूलों की खूबसूरती
सभी फूलों की महक
सभी फूलों की कोमलता
सिर से पाँव तक
उसके एक- एक अंग की
एक -एक फूल से करते हैं मिलान
अब तो कुछ लोग
उससे कभी-कभी
पूरे फूल की कीमत पूछ लेते हैं
देह की भाषा में
जबकि उसके उदास चेहरे में
किसी फूल के मुरझाने की कल्‍पना कर
निकालते हैं कई-कई अर्थ
और उसे फूलों की रानी
बनाने की करते हैं घोषणाएं
काश! वो श्रम को श्रम ही रहने देते।


खनकाती हुई चूड़ियां

जब चूड़ीहारिन घूमती है
दर-ब-दर
और लगाती है पुकार
आने लगती है
ज्‍वार की तरह तुम्‍हारी याद
बनिहारिनें गाती हैं
धान के खेतों में इठलाती हुई
सोहनी गीत
और धानी चुनरी ओढ़कर धरती
लहराने लगती लहंगा लगातार
मानो, आसमान से मिलने का
कर रही हो करार
आने लगती है
तुम्हारी याद
किलकारियाँ भरते बच्‍चों के
कोमल होठों की तरह
नवीन पत्‍तियाँ
बिहसने लगती हैं अमराइयों में
और बौरों की भीनी -भीनी
महक से
मदमाती कोयलें बरसाने
लगती हैं
मनमोहक गीतों की फुहार
आने लगती है
तुम्‍हारी याद
अलियों का गुन्‍जन
विहगों का कलरव
तितलियों का इतराना
बिछुड़े हुए कबूतरों का
मिलते ही चोंच लड़ाना
भरने लगती हैं
मुझमें नव संचार
आने लगती है
तुम्‍हारी याद
सलिला के कल-कल
निनाद पर
जब लेते चुंबन तट बार-बार
और उन्‍मत्‍त पवन छू लेता है
उसकी छाती का अग्र भाग
आने लगती है तुम्‍हारी याद
पहाड़ियां लेटी हुई
करती हैं प्रतीक्षा
मखमली घास पर होकर अर्द्धनग्‍न
और लिपट जाने को आतुरे हैं
व्‍याकुल बादलों की बाजुओं में
बेरोक टोक
और टूट कर विखर जाना
चाहती हैं
तार-तार
आने लगती है
तुम्‍हारी याद
वेदना की लहरें उठने लगती हैं
हृदय सागर में सुनामिस की तरह
जब मैं सुनता हूं
हवा में गुंजती हुई तुम्‍हारी
अंतिम हंसी
और देखता हूं
सांस की देहरी पर
बैठा हुआ तुम्‍हारा बेरोजगार बाप
निहारता है
यदा-कदा
उस जंग खाये पंखे को कि
तुम लटक रही हो निराधार
आने लगती है
तुम्‍हारी याद

====

सम्‍पर्क ः-
आरसी चौहान
चरौवाँ बलिया उ0 प्र0
221718
मोबाइल नं0-09452228335

7 blogger-facebook:

  1. तीनों ही रचनाएँ अपने अलग अस्तित्व के संग दिल को छूती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. gazab ki prastuti...........har rachna apne mein utkrisht.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. तीनों रचनाएं युगबोधक एवं मर्मस्पर्शी हैं।
    -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं

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