बुधवार, 30 जून 2010

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का उपन्यास : पी कहाँ (भाग 7)

(पिछले भाग 6 से जारी… )   ए क के बाद एक बुलावा। क्‍या हो गया है राधा को-कहीं बावली तो नहीं हो गयी। कुंवरसाहब ने हंस कर कहा-‘हां हां ...

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का उपन्यास : पी कहाँ (भाग 6)

( पिछले भाग 5 से जारी…) रात के दो बज गये थे। नींद जैसे छलावा थी। रात्रि का दूसरा पहर आया तो रोम रोम में बस गई और फिर रात्रि का तीसरा ...

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का उपन्यास : पी कहाँ (भाग 5)

(पिछले भाग 4 से जारी…) का रोबारी आदमी ठहरे-गुप्‍ता जी जिस उद्‌देश्‍य से आए थे उसे प्राप्‍त करके लौट गये। अभी मित्रों को यह जानकारी नहीं...

मंगलवार, 29 जून 2010

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का उपन्यास : पी कहाँ (भाग 4)

( पिछले अंक से जारी …)   नीं द रुठ गई थी। और एक के बाद एक बीती यादें। चन्‍द्रावती। कुंवरसाहब की छोटी बहन। सुन्‍दर और नटखट, सात वर...

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का उपन्यास : पी कहाँ (भाग 3)

( पिछले अंक से जारी…) पु रानी स्‍मृतिओं ने जैसे नींद चुरा ली थी। बीती बात निरन्‍तर याद आ रहीं थीं। अगले दिन! तब जबकि वह राजकुंवरी के साथ...

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का उपन्यास : पी कहाँ (भाग - 2)

(पिछले अंक से जारी…) हवेली का नाम था-रतनपुर पैलेस। जमींदारी उन्‍मूलन से पहले इस हवेली के स्‍वामियों की जागीर इसी नाम से पुकारी जाती थी-अ...

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