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7 जून 2010

वृन्दावन त्रिपाठी ‘रत्नेश’ के व्यंग्य-मुक्तक : अथ पेट पुराण

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कुछ लोगों का पेट जैसे तालाब होता है,

इनका घर हर तरह से आबाद होता है,

ऐसे लोग बेर के काँटे की तरह होते हैं

इनकी संगत में अपना ही दामन बरबाद होता है.

 

कुछ लोगों के पेट बड़े विशाल होते हैं,

ऐसे लोग गुरू घण्टाल होते हैं

इनके पेट में पानी तक नहीं पचता

ये तो जी का जंजाल होते हैं.

 

कुछ लोगों के पेट बड़े गहरे होते हैं,

ये अक्ल के अन्धे और कान के बहरे होते हैं

कुछ के पेट पीठ से चिपक कर एकता बनाते हैं

ये बिचारे हर किसी को अपना पेट ही दिखाते हैं.

 

कुछ के पेट बहुत बड़े होते हैं,

ये अक्सर चुनाव में खड़े होते हैं

ऐसे पेट फलते नहीं, सिर्फ फूलते हैं

ये अपना वादा सबसे पहले भूलते हैं.

 

जिन लोगों के पेट बहुत भारी होते हैं

ऐसे लोग बेहद अत्याचारी होते हैं

जिन लोगों के पेट का हाजमा उम्दा होता है

ऐसे लोग शुक्ला, मिश्रा, पाण्डेय या तिवारी होते हैं.

 

जिन लोगों के पेट बड़े चिकने होते हैं

ऐसे लोग स्पात के बने होते हैं

इनसे मुरौव्वत की आस कहाँ यारों

इनके हाथ हर दम खून से सने होते हैं

 

बढ़े पेट वाले महान होते हैं

बढ़े पेट वाले ही वक्त के भगवान होते हैं

ये बढ़े पेट के कारण ही पाप करते हैं

ऐसे ही लोग मुखौटों मे छुपे शैतान होते हैं

….

संपर्क -

डॉ. वृन्दावन त्रिपाठी ‘रत्नेश’

संपादक, सुपर इंडिया, परियावां

प्रतापगढ़

 

---

साभार – वाग्धारा – दिसम्बर 2005

4 टिप्‍पणियां:

  1. सादर!
    भाई वाह! पेट पे क्या लात मारी है आपने !
    रत्नेश त्रिपाठी

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. wah ji wahhhhh kisi ko bhi nahi choRaa aapne to ....

    its really nice

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. kuch logo ke pet ka pata nahi chalta
    ye log kushal vayhari hote hai
    kha kar dakar bhi nahi lete aapki kasam
    ye log sarkari hote hai

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. खूबसूरत करीके से इन पेटुओ के पेट पर लात मारी है आपने

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

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