बुधवार, 7 जुलाई 2010

महावीर सरन जैन की किताब : हिंदी की अन्तर-क्षेत्रीय, सार्वदेशीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूमिका – अध्याय 7

( अध्याय 6 से जारी..)

 

हिंदी की अन्तर-क्षेत्रीय, सार्वदेशीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूमिका

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

एम0ए0, डी0फिल, डी0लिट्0

प्रोफेसर महावीर सरन जैन(सेवानिवृत्‍त निदेशक, केन्‍द्रीय हिन्‍दी संस्‍थान) 123, हरिएन्‍कलेव, चांदपुर रोड, बुलन्दशहर - 203001

 

अध्याय 7.

द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् विदेशों में हिन्दी साहित्य सृजन एवं साहित्य समीक्षा

संसार के अनेक देशों में आप्रवासी भारतीयों के द्वारा विपुल मात्रा में हिन्दी साहित्य का सृजन किया जा रहा है। इस दिशा में अनेक विद्वानों ने कार्य किया है। इस आलेख में विदेशी हिन्दी साहित्यकारों के अतिरिक्त मारीशस, फीजी, सूरीनाम आदि देशों के भारतीय मूल के नागरिकों के द्वारा रचित हिन्दी साहित्य के सम्बंध में ही विचार किया जाएगा। इस आलेख में अमेरिका, कनाडा, इंगलैण्ड आदि देशों में भारत में जन्मे तथा अब उन देशों में बसे हुए अथवा निवास करने वाले आप्रवासी भारतीय हिन्दी साहित्यकारों के साहित्य के सम्बन्ध में विचार नहीं किया जा रहा है। मारीशस, फीजी, सूरीनाम आदि देशों में हिंदी के रचनाकारों की संख्या भी सैकड़ों में है। इस लेख में सभी रचनाकारों के नाम देना संभव नहीं है। यहां हिंदी के प्रमुख रचनाकारों का परिचय एवं उन प्रसिद्ध ग्रंथों का उल्लेख किया जाएगा जिनमें रचनाकारों की रचनाएं संकलित हैं अथवा जिनमें रचनाकारों का परिचय प्रस्तुत है :-

1- मारीशस - 1971 में प्रकाशित ‘प्रवासी स्वर' में मारीशस के 11 कवियों की कविताएं संकलित हैं। प्रमुख कवि हैं - बृजेन्द्र भगत, सोमदत्त बखौरी तथा अभिमन्यु अनत। कहानीकारों में प्रमुख हैं - श्रीमती भानुमती नागदान, हरिनारायण महावीर, रामदेव धुरन्दर, ईश्वर जागा सिंह। डॉ0 कामता कमलेश द्वारा संकलित ‘मारीशस की हिंदी कहानियां' शीर्षक ग्रंथ में मारीशस के हिंदी कहानीकारों की 23 कहानियां संग्रहीत हैं। गगनांचल के मारीशस अंक में 8 हिंदी रचनाकारों की साहित्यिक कृतियों का तथा 10 हिंदी लेखकों के लेखों का समावेश है। रचनाकार हैं - सिद्धहस्त एकांकीकार, कथाकार एवं लेखक अभिमन्यु अनत तथा गंगादीन; कथाकार हैं - पूजानंद नेमा तथा सोनालाल नेमधारी तथा कवि हैं - परमेश्वर तिवारी, हरि नारायण सीता, बृजेन्द्र भगत मधुकर एवं इन्द्रदेव भोला। लेखक हैं - 1. जी बन्धु.2. अनिरुद्ध द्वारका 3. धर्मवीर धूरा शास्त्री 4. पुलस्त्य रुद्रमन 5. खे. लीला 6. धनदेव बहादुर 7. अजामिल माताबदल 8. राजवन्ती अजोध्या 9. सत्यदेव प्रीतम 10. मुनीश्वर लाल चिंतामणि।

मारीशस की हिंदी प्रचारिणी सभा ने हीरक महोत्सव के अवसर पर ‘काव्य परिचय' शीर्षक पुस्तक का प्रकाशन किया जिसमें स्व0 सूर्यप्रसाद भगत, जयरूप दोसिया, सोमदत्त बखौरी जैसे श्रेष्ठ साहित्यकारों की रचनाओं के साथ-साथ वर्तमान स्थापित कवियों - हरिनारायण सीता, जनार्दन कालीचरण, सचिदानंद शर्मा, परमेश्वर बिहारी ‘शिवरत्न', डॉ0 वीरसेना जागा सिंह, डॉ0 मुनीश्वर लाल चिंतामणि, हेमराज सुन्दर, राजवन्ती अजोध्या ‘नेहा', जयवन्ती रंगू ‘शोभा' की कृतियां संकलित हैं। श्री विष्णु प्रभाकर ने अपने एक लेख में मारीशस के अनेक रचनाकारों का उल्लेख किया है। मारीशस के सर्वाधिक प्रसिद्ध रचनाकार हैं -

1- सोमदत्त बखौरी 2. अभिमन्यु अनत 3. पं0 वासुदेव विष्णु दयाल 4. प्रहलादरामशरण 5. रामदेव धुरन्धर

1- श्री सोमदत्त बखौरी - इन्होंने काव्य कृतियों तथा यात्रा वृत्तान्तों का प्रणयन किया है। काव्य कृतियों में ‘मुझे कुछ कहना है (1967)' तथा ‘बीच में बहती धारा (1971)' तथा यात्रा वृत्तान्तों में ‘गंगा की पुकार' (1972) विशेष चर्चित हैं। भारत सरकार द्वारा इन्हें 1979 में ‘विश्व हिन्दी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

2- अभिमन्यु अनत - आपका सर्जनात्मक व्यक्तित्व बहु आयामी है। आपने उपन्यास, कहानी, नाटक तथा कविता इन सभी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन्होंने 25 उपन्यासों की रचना की हैं जिनमें ‘और नदी बहती रही', ‘एक बीघा प्यार', ‘गांधी जी बोले थे', ‘मुड़िया पहाड़ बोल उठा', तथा ‘लाल पसीना' विशेष रूप से चर्चित हैं। ‘एक बीघा प्यार' के प्रकाशन के बाद अभिमन्यु को साहित्य संसार में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। ‘और नदी बहती रही' तथा ‘गांधी जी बोले थे' इन दोनों उपन्यासों में आपने भारतीय मूल के मजदूरों की दर्दभरी कहानियों का तथा जमीन मालिकों के अत्याचारों का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है। ‘मुड़िया पहाड़ बोल उठा' का कथानक देश की एक प्रसिद्ध लोककथा पर आधारित है। ‘लाल पसीना' अंग्रेजों के औपनिवेशिक शासनकाल में प्रताड़ित एवं संतप्त भारतीय मूल के कुली मजदूरों की दर्दभरी गाथा है। उपन्यास में भारतीय मजदूरों का अपार श्रम, उनकी कार्य के प्रति निष्ठा, कठोर यातनाओं के बावजूद उनका धीरज तथा समस्याओं का साहसपूर्वक सामना करने का उनका दृढ़ संकल्प आदि की सशक्त एवं मार्मिक अभिव्यंजना हुई है।

3- पं0 वासुदेव विष्णु दयाल - बहुमुखी प्रतिभा से सम्पन्न आप हिंदी के प्रसार-प्रचार के पुरोधा हैं। अनेक भाषाओं में आपकी लगभग 50 पुस्तकें प्रकाशित हैं। आपकी रचनावली भी प्रकाशित हो चुकी है।

4- प्रह्लाद रामशरण - इतिहासकार, बाल साहित्य के प्रणेता, लोक साहित्य के विद्वान, कथाकार, निबंधकार प्रह्लाद रामशरण मारीशस के नवलेखकों में सर्वाधिक उभरकर सामने आए हैं। आपकी लगभग 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

5- रामदेव धुरन्धर - चेहरों का आदमी, सहमे हुए लोग, पराजय बोध, बड़ी मछली छोटी मछली आदि कथाकृतियाँ चर्चित हैं।

(2) फीजी - श्री जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी ने अपने ‘हिंदी : घर से बाहर' शीर्षक लेख में फीजी के अनेक साहित्यकारों का उल्लेख किया है। इन साहित्यकारों में जोगिन्दर सिंह ‘कंवल' का नाम प्रसिद्ध है जिन्होंने छह उपन्यासों का प्रणयन किया है। आपको उत्तर प्रदेश शासन द्वारा ‘सबेरा' उपन्यास पर 1978 में पुरस्कृत किया जा चुका है। इनकी धर्मपत्नी श्रीमती अमरजीत ‘कंवल' के गीत भी प्रशान्त द्वीपीय देशों में प्रसिद्ध हैं। डॉ0 विवेकानन्द शर्मा की भी अनेक कृतियाँ प्रकाशित हैं।

(3) सूरीनाम - पुरानी पीढ़ी के रचनाकारों में स्व0 श्री रहमान खान का नाम उल्लेखनीय है। इन्होंने ‘दोहावली' एवं ‘ज्ञान प्रकाश' का प्रणयन किया। वर्तमान पीढ़ी के रचनाकारों में अमर सिंह रमण, श्री निवासी, जीत नारायण, पं0 सूर्य प्रसाद वीरे शूरवीर, सुरजन परोही, सूरज, रामदेव रघुवीर के नाम उल्लेखनीय हैं। श्री उमाशंकर सतीश ने सूरीनाम के लगभग 15 कवियों की कविताओं की चर्चा की है।

(4) नेपाल - श्री सूर्यनाथ गोप ने ‘नेपाल में हिंदी' शीर्षक निबंध में नेपाल के हिंदी साहित्य तथा हिंदी के रचनाकारों की जानकारी प्रस्तुत की है। नेपाल के लेखकों में बुन्नीलाल, केदार ‘व्यथित' एवं धूस्वा धूस्वा सायमि की अनेक कृतियां हिन्दी में मूल अथवा अनुवादित रूप में प्रकाशित हैं।

(5) चेक गणराज्य - विश्व के धरातल पर हिंदी के विदेशी रचनाकारों में चेक के कविवर डॉ0 ओदोलेन स्मेकल महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। इनकी कविताओं में भारतीय चेतना सशक्त रूप से अभिव्यंजित हुई है। डॉ0 स्मेकल की 8 काव्य कृतियाँ प्रकाशित हैं -

1. तेरे दान किए गीत (1982) 2. मेरी प्रीत तेरे गीत (1982) 3. स्वाती बूंद (1983) 4. नमो नमो भारतमाता (1983) 5. अविराम (1984) 6. कलम को लेकर चल (1985) 7. मधुमिलन क्षेत्र (1988) 8. हमारा हरित नीम (श्रेष्ठ कविताएं खंड-1 एवं 2) (1984)

(6) चीन - श्रीमती याङ ई फङ की 1. चीन और भारत 2. चीन में भारत शीर्षक रचनाएँ प्रकाशित हैं।

विदेशों में हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक अध्ययन-

हिंदी साहित्य का इतिहास तथा साहित्यिक कृतियों का उन्नीसवीं शताब्दी एवं बीसवीं शताब्दी के प्रथम चरण में आलोचनात्मक अध्ययन करने वाले विदेशी विद्वानों में गार्सां द तासी, ग्रियर्सन एवं डॉ0 एल0पी0 टेसीटॅरी के नाम सर्वविदित हैं।

समकालीन विद्वानों में रूस के ई0पी0 चेलीशेव का 1968 में लिटरेचुरा हिंदी (हिंदी साहित्य) तथा 1992 में नताल्या मिखाइलोना साजनोवा का मध्यकालीन अष्टछाप के प्रसिद्ध भक्त कवियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर ग्रंथ प्रकाशित हुए।

चीनी भाषा में प्रोफेसर ल्यू आन ऊ ने ‘भारतीय हिन्दी साहित्य का इतिहास' , ‘प्रेमचन्द और उनके उपन्यास एवं कहानियां' तथा एसोसिएट प्रोफेसर च्याङ चुङ खुई ने ‘हिन्दी नाटक एवं एकांकी का इतिहास‘ शीर्षक ग्रन्थों का प्रणयन किया।

जापान के विद्वान प्रो0 तानाका ने आधुनिक हिंदी साहित्यकारों एवं विद्वानों पर मौलिक रूप से विस्तृत शोध कार्य किया है। साहित्य का इतिहास, मध्यकालीन हिंदी साहित्य तथा आधुनिक हिंदी साहित्य के क्षेत्र में आलोचनात्मक अध्ययन करने वाले जापानी विद्वानों का विवरण प्रो0 कात्सुरो कोगा ने अपने एक लेख में प्रस्तुत किया है। प्रोफेसर आकिरा ताकाहाशि के मिथिलेश्वर की कहानियों एवं मुल्ला वजही कृत सबरस की दक्खिनी हिन्दी पर किए गए कार्यों के अतिरिक्त दिल्ली विश्वविद्यालय से सन् 1999 में पी-एच॰डी॰ के लिए स्वीकृत शोध प्रबन्ध भी उल्लेखनीय है । इनके शोध प्रबन्ध का शीर्षक है - ‘ नवें दशक के हिन्दी उपन्यासों में नैतिकता बोध '। प्रोफेसर तेइज़ि साकाता के जापानी में हिन्दी साहित्य का इतिहास तथा सूरसागर पर लिखे गए शोध-निबन्धों का उल्लेख करना आवश्यक है। प्रोफेसर ताइगेर्न हाषिमोतो ने सन्त साहित्य तथा विषेशत : कबीरदास की विचारधारा एवं भाषा पर कार्य किया है।

इंग्लैंड के डॉ0 रूपर्ट स्नेल ने राधा वल्लभ सम्प्रदाय पर अनुसंधान किया है।

नेपाल साहित्य के ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ कवि केदार ‘व्यथित' की हिंदी की दो काव्य कृतियां विशेष चर्चित हैं - 1. हमारा देश : हमारा स्वप्न 2. अग्नि श्रृंगार। लोकप्रिय उपन्यासकार एवं कहानीकार श्री बुन्नीलाल ने अनेक रचनाओं का प्रणयन किया। इनके ‘नयन कहर दरियाव' शीर्षक उपन्यास में नेपाल के पूर्वांचल का जीवन सशक्त रूप में चित्रित है। नेपाल साहित्य के ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ कवि केदार ‘व्यथित' की हिंदी की दो काव्य कृतियां विशेष चर्चित हैं - 1. हमारा देश : हमारा स्वप्न 2. अग्नि श्रृंगार।

 

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(क्रमशः अगले अंकों में जारी…)

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