मंगलवार, 13 जुलाई 2010

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : बहस जारी है

yashwant kothari new (Mobile)

मुझे मालवीय नगर जाना था ।

बस के इन्तजार में खड़ा था । और बस थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही थी । मेटाडोर आई और चली गई । कुछ अफसरनुमा लोगों ने टाई की नॉट ठीक की । बाबुओं ने लंच बाक्स को इस हाथ से उस हाथ में लिया । महिलाओं ने वेनिटी बेग में से शीशा निकाला । चेहरा देखा, लिपस्टिक ठीक की । लेकिन बस थी कि फिर भी नहीं आई । कुछ टैम्पो रिक्षा वाले भी चक्कर काटने लग गए ।

इधर लाइन महंगाई की तरह बढ़ने लगी । साथ ही बातचीत का सिलसिला भी शुरू हो गया ।

रूस में क्या होगा ?

तुम्हारा क्या है ?

डी.ए. बढ़ने वाला है ।

कितना बढ़ेगा ? यह तो पता नहीं ।

सुनो, पे कमीशन की रिपोर्ट आने वाली है ।

रिपोर्ट आने से भी क्या हो जायेगा । लागू हो तब तो बात बने ।

बात तो बस के आने से भी बन जायेगी ।

आये तो सही ।

और धड़धड़ा कर बस आई ।

कण्डक्टर ने सीटी मारी और बस वापस चल दी । कुछ सवारियां इस बीच चढ़ गयी । वार्तालाप जारी रहा ।

ईरान ईराक फिर लड़ रहे हैं ।

लड़ने दो, आखिर हथियारों का कुछ उपयोग तो हो ।

तो आपको लड़ाई में मजा आ रहा है ।

भाईजान मजा तो बस के सफर में आ रहा है ।

बस अंग्रेजी का सफर रहे हैं ।

एक मोड़ आया, बस मुड़ी फिर सीधी चल दी । बहस आगे बढ़ी ।

चुनाव होने वाले हैं ।

अवश्य होंगे । आखिर प्रजातन्त्र है कोई मजाक थोड़े ।

लेकिन एक बात है ।

हां, हां बोलो ।

कोऊ नृप हो हमें का हानी ।

....वाह साहब वाह आपने भी क्या बात कह दी । अरे देश में हमारी सरकार है, हम सरकार बनाते हैं । अरे छोड़ो यार, लो अजमेरी गेट आ गया । अच्छा बाबा मैं तो चला ।.....

बहस फिर भी जारी है ।,

बिहार आन्दोलन असफल रहा ।

जे.पी. भी चले गए ।

चन्द्र शेखर की पदयात्रा प्रभावी रही ।

विपक्षी दल कलकत्ता से चले, जम्मू तक पहुंचे ।

नो दिन चले अढ़ाई कोस ।

रामाराव ने कमाल किया ।

हां भाई साहब टिकट ले लीजिये । यह कण्डक्टर था, जो शाश्वत बहस के बीच आ पड़ा । दाल-भात में मूसलचन्द । कण्डक्टर गया । बहस आगे बढ़ी ।

मध्य प्रदेष में कविता वापस आ गयी ।

और सरकारी गोदामों में बन्द हो गयी ।

एक ठहाका ....हां....हां....हां.....

यार, ये सब पार्टी वाले आपस में क्यों लड़ते हैं ?

आपस में नहीं लड़े तो क्या तुमसे लड़ें ।

अमाँ यार छोड़ो इन पार्टी के लफड़ों को । लो सुपारी खाओ। बचना जरा अपना लंच बाक्स सम्भालो । सब अचार कपड़ों पर आ रहा है । छोड़ो भी ......

बहस जारी है ।

डण्डों के बिना राज नहीं चलता ।

देखा नहीं इमरजेन्सी में, दस दफ्तर में बजते थे और आज ग्यारह बजे तक तो बस का इन्तजार हो रहा है ।

तो क्या हो गया ... कौन देष ने तरक्की कर ली ।

तुम्हें नहीं मालूम, हम स्पेस, संचार और परमाणु कार्यक्रमों में विष्व में क्रमशः तीसरे, पांचवें और छठे हैं ।

तो क्या हम भ्रष्टाचार में अव्वल है । यह क्यों नहीं कहते ।

महंगाई में पहले नम्बर पर हैं ।

छोड़ो कोई और बात करो ।

बहस जारी है ।

इस बार का बजट ठीक रहा ।

क्या ठीक रहा । इन्कम टैक्स की लिमिट तो बढ़ी नहीं ।

हां, यह तो हो जाना चाहिए था ।

देखो, शायद अब हो जाए ।

महंगाई के भी अपने मजे हैं । मैं कहता हूं गेहूं 3 रूपये किलो और वे कहते हैं नई कार नब्बे हजार की हो गयी ।

अरे सक्सेना, देख रामबाग आया ।

आया और गया । अच्छा चलें अगले स्टाप पर उतर जायेंगे ।

लो लाल बत्ती आ गयी उतर जाओ ।

मैं भी उतर गया । लेकिन बहस जारी है । यह हमारा एक मात्र राष्ट्रीय कार्यक्रम है ।

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यशवन्त कोठारी 86, लक्ष्मीनगर ब्रह्मपुरी बाहर, जयपुर 302002 फोन 2670596

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