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वीरेन्द्र जैन की हास्य व्यंग्य कविता : नेताओं के रथ के साथ

virendra jain वीरेन्द्र जैन

 

धर्म के झण्डे, जात के फण्डे,

नेताओं के रथ के साथ

 

गाँव के गुण्डे, सब मुस्तण्डे

नेताओं के रथ के साथ

 

शंख झालरें, भजन आरती

माइक लाउडस्पीकर संग

 

मन्दिर के सब घण्टी घण्टे

नेताओं के रथ के साथ

 

फूल तितलियाँ चाँद चाँदनी

घर के भीतर दुबके हैं

 

चाकू छुरियाँ लाठी डण्डे

नेताओं के रथ के साथ

 

तोता मैना पिंजरे में हैं

कोयल है अमराई में

 

लेकिन सारे गाँव के कुत्ते

नेताओं के रथ के साथ

 

नेताओं की सभी इन्द्रियाँ

चौकस और भली चंगी

 

देश के सारे अक्ल के अन्धे

नेताओं के रथ के साथ

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वीरेन्द्र जैन

2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड

अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023

मो. 9425674629

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मंगलवार २० जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

http://charchamanch.blogspot.com/

क्या बात है क्या क्या अवांछित चीजें नही है नेताओं के रथ के साथ। सुन्दर। हास्य के साथ व्यंग्य।

लेकिन सारे गाँव के कुत्ते

नेताओं के रथ के साथ

वाह वा...क्या खूब कहा है...वाह...

नीरज

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