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डॉ. श्याम गुप्त का पावस गीत

बादल cloud पावस गीत वर्षा बरसात

छाये श्यामल घन....
छाये श्यामल घन चहुँ ओर
झनन  झन बरसे पानी |
आये दूर देश ते आली !
झनन झन बरसे पानी |
छाई श्याम घटा घनघोर ,
झनन झन बरसै पानी ||

भीजें खेत बाग़ घर आँगन ,
भीजें तरु उपवन मग कानन |
अलि! भीजै डाली डाली ,
झनन झन बरसै पानी |
सखि! भीजै छप्पर  छानी,
झनन झन बरसै पानी ||

प्यासी धरती प्यास बुझाए ,
खेतों में अंकुर हरियाये |
फहरै चूनर धानी ,
झनन झन बरसै पानी |
कहै, मुरिला प्रीति के बानी,
झनन झन बरसै पानी ||

अम्बर बरसै,सब जग हरसै
तन तरसे अंतरमन सरसे |
बहै शीतल पवन सुहानी ,
झनन झन बरसै पानी |
जिया, धड धड धड़के आली ,
झनन झन बरसै पानी ||

सजनी भीजै साजन भीजै ,
मन भीजै, मन भावन भीजै |
छलके प्रीति पुरानी,
झनन झन बरसै पानी, |
मन चाहे करन मनमानी ,
झनन झन बरसै पानी ||

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बहुत सुन्दर व सरस कविता। बधाई

गुप्त जी को बधाई

धन्यवाद

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