रविवार, 25 जुलाई 2010

कान्ति प्रकाश त्यागी की हास्य व्यंग्य कविता : हम स्वतंत्र हैं

hasparihas

हम स्वतंत्र हैं

डा० कान्ति प्रकाश त्यागी

बलिदानों से मिली आज़ादी, हम स्वतंत्र हैं
परन्तु हम ज़रूरत से ज्यादा ही स्वतंत्र हैं
हम स्वतंत्र हैं, चाहे डिटर्जेन्ट से दूध बनायें
हम स्वतंत्र हैं, पनीर में यूरिया आदि मिलाये
स्वतंत्र हैं,फ़ल सब्ज़ियों में इंज़ेक्शन लगाये
जनता के स्वास्थ्य पर,ज़हरीली छुरियां चलायें
स्वतंत्र हैं, पुरानी दवाइयों को बाज़ार में लाये
प्रसिद्ध कम्पनियों के नाम पर ,अरबों कमायें

हम स्वतंत्र हैं, कर ले अरबों का घोटाला
जो हमें टोके, कर दें उसी का मुँह काला
स्वतंत्र हैं, किसी की कहीं भी पगड़ी उछालें
जो दे भाषण, पहले उसी को घर से उठालें
हम स्वतंत्र हैं, किसी से मांगे लाखों का धन
न देने पर सरे आम कर दें, उसका कतल

जब चाहे किसी के घर में घुसें, बहू बेटियां उठाले
यदि करे रिपोर्ट पुलिस, पुलिस से उसे फंसवा दे
यह निश्चित है, हमारा कुछ नहीं होने वाला
यदि नेता अफ़सरों को देते दिलाते रहें निवाला

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Dr.K.P.Tyagi
Prof.& HOD. Mech.Engg.Dept.
Krishna institute of Engineering and Technology
13 KM. Stone, Ghaziabad-Meerut Road, 201206, Ghaziabad, UP

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