शोभा गुप्ता के हास्य व्यंग्य दोहे

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जिम्मेदार कौन ?

नेता ने जनता से बोला ये रोना-धोना छोड़

बात पुरानी बोझ बन गई उसको ढोना छोड़

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं कारण कहा हाथ को जोड़

तू मंहगाई का कोई ठीकरा मेरे सिर मत फोड़ ॥ १॥


अनाज सड़े गोदाम से बाहर किसको सुध है भाई

नाम,पता गोदाम का लेकर ट्रक में शराब है आई

अब सरकारी गोदामों में अवैध माल संभलेगा

राशन की दूकान पर लिखा "चीनी नहीं है आई"॥ २॥


धरती छोटी बड़ी आबादी,प्रजनन की आजादी

कंक्रीट के जंगल देखो और खेतों की बर्बादी

दूध,अनाज,फल जहर मिले हैं मरने की आजादी

दोष नहीं यह सरकारी है व्यवसायिक आजादी ॥ ३॥


फैशन के इस दौर में नकली अब सामान मिलेगा

अजी पैसे भी तब देने होंगे जब सामान मिलेगा

बाजारवाद की महिमा को तब तुम भी समझोगे

तेरे ही घर की बाजारों में अमेरिका,जापान मिलेगा ॥ ४॥


आतंकवाद है एक खिलौना मिलकर सब खेलेंगे

दद्दा ने ही हुक्म दिया है इसे अब की हम झेलेंगे

विकासवाद की इस थ्योरी को भारत जब पढ़ लेगा

जब दद्दा का आदेश मिलेगा तब और लोग खेलेंगे॥ ५॥


शोभा गुप्ता
जनकपुरी,नई दिल्ली
३० जुलाई २०१०   

3 टिप्पणियाँ "शोभा गुप्ता के हास्य व्यंग्य दोहे"

  1. अच्छी अभिव्यक्ति है ---पर शोभाजी ये दोहे नहीं हैं, मुक्तक हैं।
    ---दोहा दो पंक्तियों का छंद है-१३-११; १३-११ मात्राओं का। यथा...

    रहिमन याचकता गहे, बडे छोट है जात ।
    नारायण को हू भयो, बाबन आंगुर गात ॥

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  2. डॉ. श्याम गुप्त जी,
    दरअसल भूल मुझसे हुई है - शीर्षक देने में.
    क्षमा चाहूंगा.

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  3. अति सुन्दर मुक्तकों के लिए बधाई स्वीकारें।

    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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