रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

“राधास्वामी” अतुल की कविता - माई

clip_image002

हुई थी पुलकित सघन, पाकर कोख में मुझे।

रूधिर, मांस, मज्‍जा, अस्‍थि, रहने को देह दी मुझे॥

रूप आगम जब हुआ, आंगन खुशी से भर गया।

मुस्‍काई थी वो विहगंम, पाकर गोद में मुझे॥

झूमते थे नयन उसके, जब कदम मेरे झूमते।

बांह होती मुझको लपेटे, मेरे गिरने ही से पहले।

दुख मेरा था, त्रास उसका।

किलक मेरी उसकी हंसी।

बेखौफ रहता नींद में भी, आंचल में जब सुलाती मुझे॥

बीतते यों दिन रहे पर प्रेम उसका न घटा।

ये संस्‍कार की थी बानगी, जो जीवन आत्‍मनिर्भर जिया।

वेतन जो उसके हाथ देता, निहारती थी मुझे॥

उत्‍कण्‍ठा उसके हृदय जगी, बहू घर आयेगी।

स्‍वप्‍न क्‍यारियां बोई उसने, कि गुलबहार महक उठे।

उसकी खुशी की लहक ने, मुस्‍कान परिचित दी मुझे॥

फिर रूप बदला रंग बदला, कुटिल अवसरों ने ढंग बदला।

जीवन संगनि का प्रेम पा, प्रेम का आधार बदला।

क्रोध ने न शब्‍द तोला, जीवन दायिनी को बोला,

‘‘ये घर है मेरा, मेरा घर है ये, निकल यहां से- निकल यहां से '',

स्‍नेह भरा हाथ खोया वात्‍सल्‍य पूरित अंक खोया,

प्रेम को कर निरूत्‍तर, द्वेष-बीज मन बोया।

खोई गरिमा, भूले रिश्‍ते, आज होता बोध मुझे॥

हॅूं व्‍यथित विचारता, यह मेरा दायित्‍व था,

देह-घर दिया जिसने, उसे निकालने से पहले

उसका दिया यह देह-घर छोड़ना था मुझे॥

­­­­-----

‘‘राधास्‍वामी'' अतुल

clip_image004

नाम- अतुल कुमार मिश्रा पुत्र श्री अमर नाथ मिश्रा,

पता- 369, कृष्‍णा नगर, भरतपुर (राज0)

 

ईमेल atulkumarmishra007@gmail.com

ब्लॉग http://atulkumarmishra-atuldrashti.blogspot.com/

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

बेनामी

बहुत सुन्दर रचना है

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget