रविवार, 11 जुलाई 2010

विजय कुमार वर्मा की हास्य कविता : बाकी सब ठीक है

बाकी सब ठीक है

hasparihas हास्य कविता hasya kavita
महंगाई बहुत है ,वे भी करते तसदीक है,

और हम क्या कहें बाकी सब ठीक है.


-दिन-दिन वसन उतर रहा तन से,ना यह लन्दन

ना पेरिस ना ग्रीस है, बाकी सब ठीक है.

 

लाशों पे हँस-हँस के सियासत कर लेते हैं, कहते--

यहाँ की जनसंख्या अधिक है, बाकी सब ठीक है.

 

जो जितना दूर जनता से, सत्ता के उतना करीब है

और हम क्या कहे,बाकी सब ठीक है.

 

'हिन्दुस्तानी' सिर्फ परदे पे , नहीं तो ठाकुर, ,यादव

हरिजन, ब्राम्हण, बनिक है, बाकी सब ठीक है.

 

एक ओर नेता , एक ओर अफसर, जनता फुटबॉल

सब मारत फ्री-किक है, बाकी सब ठीक है.

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विजय कुमार वर्मा डी एम डी -३१/बी,बोकारो थर्मल

vijayvermavijay560@gmail.com

1 blogger-facebook:

  1. बढ़िया व्यंग...और क्या कहें, बाकी सब ठीक है.

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