गुरुवार, 8 जुलाई 2010

दीनदयाल शर्मा की बाल कविताएँ

Deendayal Sharma (WinCE)_thumb[1]

बारिश का मौसम

बारिश का मौसम है आया।

हम बच्चों के मन को भाया।।


'छु' हो गई गरमी सारी।

मारें हम मिलकर किलकारी।।


कागज की हम नाव चलाएं।

छप-छप नाचें और नचाएं।।


मजा आ गया तगड़ा भारी।

आंखों में आ गई खुमारी।।


गरम पकौड़ी मिलकर खाएं।

चना चबीना खूब चबाएं।।


गरम चाय की चुस्की प्यारी।

मिट गई मन की खुश्की सारी।।


बारिश का हम लुत्फ उठाएं।

सब मिलकर बच्चे बन जाएं।।


 

मोबाइल

माँ, मैं भी मोबाइल लूँगा,

अच्छी-अच्छी बात करूँगा।


हर मौके पर काम यह आता,

संकट में साथी बन जाता।


होम-वर्क पर ध्यान मैं दूँगा,
पढऩे में पीछे न रहूँगा।

मेरी ख़बर चाहे कभी भी लेना,
एस० एम० एस० झट से कर देना।

स्कूल समय में रखूँगा बंद,
सदा रहूँगा मैं पाबंद।

कहाँ मैं आता कहाँ मैं जाता,
चिंता से तुझे मुक्ति दिलाता।

माँ धर तू मेरी बात पे ध्यान,
अब मोबाइल समय की शान।

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दीनदयाल शर्मा

साहित्य संपादक (मानद )

टाबर टोली, हनुमानगढ़

पिन कोड - 335  512

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