मंगलवार, 31 अगस्त 2010

महेन्द्र वर्मा की ग़ज़ल

ग़ज़ल उनकी भोली मुस्कानों से जलते हैं कुछ लोग, जाने कैसी-कैसी बातें करते हैं कुछ लोग।   धूप चांदनी सीप सितारे सौगातें हर सिम्त, फिर भी अपन...

दीनदयाल शर्मा की बाल कहानी – मित्र की मदद

बाल कथा- मित्र की मदद : दीनदयाल शर्मा एक थी गिलहरी और एक था तोता। गिलहरी का नाम था गिल्लू और तोते का नाम था टिल्लू। गिल्लू और टिल्लू पक्के...

जया अपर्णा की कविता – अभी सभ्य होना शुरू ही किया है…

अभी सभ्य होना शुरू ही किया है.... पसरे हुए जंगल के किनारे वाला वह पहला गाँव मेरा ही तो है... एक दिन वह जंगल ... ओझल हो चुका होगा आँख...

सोमवार, 30 अगस्त 2010

सूरज प्रकाश का संस्मरणात्मक आलेख : कहानी की चोरी और चोरी की कहानी

  कथाकार तेजेन्‍द्र शर्मा ने कुछ दिन पहले एक ई-मेल भेज कर सब दोस्‍तों को बताया था कि कहानीकार राजीव तनेजा ने उन्‍हें बताया है कि किसी ने उ...

क़ैस ज़ौनपुरी की कविता - मंदिर

कविता. मंदिर मैं अपने रास्‍ते से जा रहा था रास्‍ते में देखा एक मंदिर था किसी देवी का लाल रंग से पुती हुई चुनरी में लिपटी हुई मैंने सिर झु...

शशांक मिश्र ‘भारती' का निबन्ध : मानव सेवा से ही राष्ट्रोन्नति संभव

मानव सेवा से ही राष्‍ट्रोन्‍नति सम्‍भव डॉ0 शशांक मिश्र ‘भारती' मनुष्‍य मात्र की सेवा करना तथा पुरूषार्थ के द्वारा हमेशा सत्‍कर्म कर मन,...

रविवार, 29 अगस्त 2010

विजय वर्मा की लघु कविता – एक बरसाती शाम

एक बरसाती शाम तरु-पत्रों से गिरते बूँद, बूँद, बूँद कल के सूखे गड्ढे आज  के   समुद्र. ऊंचे-ऊंचे टीले पर हरी-हरी दूब शनैः शनैः...

अरुणा कपूर की कहानी – अंधकार से आती आवाज

कहानी                                                                                       .. .अंधकार से आती आवाज! -डॉ. अरुणा कपूर. आवा...

राजेश ‘विद्रोही’ की ग़ज़लें

(1) नानक की नेकियों को भुनाते रहे हैं हम । गौतम का पुण्‍य बेचकर खाते रहे हैं हम ॥   जारी है अब तलक भी अँधेरों की अर्चना । सदियों स...

ज्‍योति सिन्हा का आलेख : राग, रोग और रोगी - अन्‍तः सम्‍बन्‍धों की विवेचना

राग , रोग और रोगी - अन्‍तः सम्‍बन्‍धों की विवेचना डॉ․ ज्‍योति सिनहा प्रवक्‍ता (संगीत) भारतीय महिला पी․जी․ कालेज जौनपुर एवं रिस...

शनिवार, 28 अगस्त 2010

विजय वर्मा की हास्य व्यंग्य कविता : बीती विभावरी

बीती बिभावारी [जयशंकर प्रसाद जी की आत्मा से क्षमा -याचना सहित] बीती बिभावारी, जाग री ! कैसे तू इनके चंगुल में आन पड़ी शिघ्रात...

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

पुरूषोत्तम विश्वकर्मा के व्यंग्य

सातवीं पढ़ा व्‍यंग्‍यकार चाचा दिल्‍लगीदास कक्षा नवम्‌ की पाठ्‌‌य पुस्‍तक ‘गद्य-पद्य संग्रह भाग एक' का कोई पाठ पढ़ कर एक लंबी सांस लेने ...

दामोदर लाल जांगिड़ की ग़ज़लें

ग़ज़ल .1 जाने कैसी खबर छप गयी है अब के अखबारों में। खौफज़दा है मची खलबली सारे इज्‍जतदारों में॥   मंदिर मंदिर ढूंढ रहा हूं धूप बत्‍तियां लेक...

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

अवनीश सिंह चौहान की पुस्तक समीक्षा : अधूरा सच – रमाकांत दीक्षित का कहानी संग्रह

समीक्षित कृति -‘अधूरा सच‘ – कहानी संग्रह कथाकार – रमाकांत दीक्षित आज के महानगरीय जीवन का सत्‍य अवनीश सिंह चौहान ‘साहित्‍य सम्‍पूर्ण ...

अवनीश सिंह चौहान की पुस्तक समीक्षा – सैयद रियाज रहीम का ग़ज़ल संग्रह : पूछना है तुमसे इतना – जीवन की हकीकत बयान करती ग़ज़लें

हमारे जीवन की हकीकत बयान करती गजलें समीक्षक- अवनीश सिंह चौहान जो हजारों साल से मैं कह रहा हूं फिर वही इक बात कहना चाहता हूं। ...

अपर्णा की कविता : पूस की रात (एक भूली-बिसरी कहानी जो चल रही है .....)

ह ल्कू , मुन्नी और जबरा - हूँ .. कितनी पीढ़ियों तक ? पूस की आदत है क्या ? तुम्हारे खून में रात बनकर बैठी है ? या ठहर गयी है सूखी हड्डियों मे...

नन्‍दलाल भारती की कविताएँ

- बाकी है अभिलाषा सराय में मकसद का निकल रहा जनाजा छल-प्रपंच,दण्‍ड-भेद का गूंजता है बाजा नयन डूबे मन ढूंढे भारी है आज हताशा आदमी बने रहने ...

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