शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

गिरीश पंकज का व्यंग्य - बाढ़ : दो दृश्य

girish_pankaj

व्यंग्य...

बाढ़ : दो दृश्य

गिरीश पंकज


मंत्री जी ने बाढ़ को ऊपर से निहारा.
दृश्य बड़ा ही  मजेदार था. मनोरम था. उनकी निजी बीवी ने कुछ तस्वीरे उतार ली. ऐसे अद्भत नज़ारे सौभाग्य से मिलते है. पूर्व जनम में कुछ अच्छे कर्म करो तब बाढ़ के  हवाई सर्वे करने का सुफल मिलता है.हर बड़े नेता, उसके परिवार और कुछ अफसरों को अवसर मिलता ही मिलता है.
मंत्री ने  निहारा.बेचारी  बाढ़ पानी-पानी हो गई. शरमा गयी.. लजा गई ...सच कहें तो घबरा गयी, सोचने लगी-
'बाप रे,  मंत्री ने देख लिया. अब क्या होगा. बलात्कार-फलात्कार न कर दे'.
कुछ मंत्रियों की बुरी नज़रों के बारे में बाढ़ ने बहुत-सी खतरनाक किस्म की बातें सुन रखी थीं. कुछ ख़ास किस्म के मंत्री  हर स्त्रीलिंग को ज़रुरत से  ज्यादा घूर कर देखते है. और फिर यह मंत्री जिस कुटिलता के साथ बाढ़ को देख रहा था, उसे देख कर बाढ़ गाँव की नवयौवना की तरह भयंकर डर गई थी. बाढ़ को लगा, उसे अब लौट जानाचाहिए वर्ना कुछ भी हो सकता है. मंत्री के पैर ज्यादा देर तक रहे तो  तकलीफ होने लगेगी. बाढ़ ने अपना पानी समेटना शुरू किया.
पानी को कम होता देख मंत्री मुस्काए. पहले अपने पीए को देखा. वह पहले से पीया हुआ था. फिर मंत्री ने आसपास खड़े लोगो को देख कर धन्य किया.
एक का चमचत्व जगा. वह बोला- '' आज तो गज़ब हो गया सर. आप आये और पानी उतारने लगा? ''
मंत्री जी मन ही  मन मुसकराए, एक बर्बादी के आगे दूसरी बर्बादी टिक नहीं सकती. फिर प्रकट में  बोले- '' हे...हे...हे... हमारा असर देख लो ''
दूसरे ने उत्साहित होते हुए कहा- ''आप बाढ़ में ही क्यों नहीं समा जाते...?''
''क्या मतलब..?'' मंत्री जी भड़के
''मतलब यह सर, कि आप और आगे बढ़े, बाढ़ पीछे हटाती चली जायेगी''.
''ओह, ये बात है''..मंत्री जी बोले, ''लेकिन अभी इतना पर्याप्त है. पानी उतरा रहा है. चलो, दूसरी जगह भी चलें. वहां का पानी भी उतर जाएगा''.
मंत्री जी को अपने ऊपर ओवर कान्फिडेंस जैसा कुछ-कुछ होने लगा था.
मंत्री जी की  सवारी दूसरी जगह के लिये उड़ गाई. बाढ़ फिर जस का तस हो गाई. बाढ़ में फंसे लोग खाने-पीने के पैकेट्स देख रहे थे.कुछ ने हाथ हिलाया, कुछ ने पैरों को ऊपर किया. जिसकी जैसी स्थिति थी, वैसा किया.

 
(२)
हेलीकाप्टर बाढ़ वाले हिस्से के ऊपर मंडरा रहा था. वह कुछ ऊंचाई पर था. नज़ारा ठीक से दिख नहीं रहा था.
हेलीकाप्टर नीचे किया गया. मंत्री की पत्नी ने कहा-''थोड़ा और नीचे''.
हेलीकाप्टर नीचे हुआ.
मंत्री की चुलबुली किस्म की बीवी ने कहा-'' थोड़ा-सा और नीचे ''.
थोडा-सा और नीचे करते-करते हेलीकाप्टर अचानक  बाढ़ के पानी में ही समा गया. लोगो ने राहत की सांस ली. अब शायद तगड़ा मुआवजा मिलेगा. बाढ़पीड़ितों को देखते-देखते बेचारे मंत्री जी शहीद जो हुए है..मज़े की बात उनकी पत्नी बचा ली गयी. मंत्री की आत्मा अपने इस बलिदान पर संतुष्ट थी. उपचुनाव में अब उनकी बीवी की टिकट पक्की.

--
गिरीश पंकज
संपादक, " सद्भावना दर्पण"
सदस्य, " साहित्य अकादमी", नई दिल्ली.
जी-३१,  नया पंचशील नगर,
रायपुर. छत्तीसगढ़. ४९२००१
मोबाइल : ०९४२५२ १२७२०

4 blogger-facebook:

  1. बहुत ही करार तंज़| बाढ़ जैसी विभीषिका पर भी इन तथाकथित जनसेवको के द्वारा आनंद लेना.....जैसा अंत अपने बताया है वैसा ही अंत होना चाहिए

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  2. बहुत सुन्दर ब्यंग्य...पदढकर मजा आ गया.

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  3. बचाने में भी षड्यंत्र :)

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  4. बाढ और मंत्री ऐसी आपदायें हैं जिन्हें ता-उम्र हमें झेलना है। बाढ से बचने का रस्ता आज नहीं तो कल ढूंढ लिया जायेगा पर मंत्री रूपी आपदा से बचने का उपाय भगवान भी नहीं ढूंढ सकता। बहुत सुन्दर व्यंग, बधाई।

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