सोमवार, 16 अगस्त 2010

विजय कुमार शर्मा "आज़ाद" की कविता - क्या हम आज़ाद हैं ?

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क्या हम आज़ाद हैं ?
१. क्या हम आज़ाद हैं?

मजाक नहीं सत्य बोलना,
क्या हम आज़ाद है ?
आज़ाद पर्याय स्वतंत्रता,
या ये शब्द एक अपवाद है ?
सीखी थी हमने आज़ादी की परिभाषा,
किसी सीमा में निहित नहीं जन जन की आशा
कोई घूम सकता है स्वतंत्र
कोई बोल सकता है स्वतंत्र
देश की उन्नति की स्वतंत्रता
बलि बेदी पे आहुति की स्वतंत्रता
...........................................

 
२. क्या हम आज़ाद हैं?
पर ये कैसी आज़ादी ?
नक्सलवादी माओवादी का डर जो छाया है
ये ही उन्नति है, या अवगति का साया है ?
पल पल कोस पे डर बना रहता है
देश के कर्णधारों का कोप जो बना रहता है
शायद कहीं बम ना फट जाये
शायद कही बाढ़ ना आ जाये
.............................................

 
३. क्या हम आज़ाद हैं?  
भारत की आज़ादी पे खायी थी बहुत कसमें ?
हम एक खुशहाल भारत बनायेंगे
हर जन जन के लिए घर बनायेंगे
बहकेगा चमन गंगा के जल से
ना होगा दुःख गरीब को किसी छल से
पर क्या आज जनता फुटपाथ पे नहीं सोती ?
क्या सबको मिल गया कपड़ा मकान और रोटी
क्या सरिता का पानी निखर गया है
या कारखानों के कचरों से भर गया है
...................................................

 
४. क्या हम आज़ाद हैं?  
आज़ादी के दौरान किये थे बहुत वायदे
भारत में एकता बनी रहेगी
भारत में समता बनी रहेगी
भारत की धरोहर को सजा के रखा जाएगा
भारत में भारतीयता का अहसास बचा के रखा जाएगा
क्या हमारी विविधता में एकता नजर आती है ?
बाँट रहे वो रखवाले कौम क्षेत्रीयता ही नजर आती है
समता शब्द का तो बहुत अपमान किया है
संसद से लेकर गली गली में समता का हान किया है
किस धरोहर को हम बचा के रख रहे है
उजड़े पेड़, फूल, पौधे, वन्य जीव, क्या हम बचा के रख रहे है ?
भारतीयता का अहसास क्या तुम ख़ाक जानते हो
अंग्रेजी बड़प्पन में बोली हिंदी को न पहचानते हो
ये धन लोलुप कमजोर सत्ता, तड़प रही मेरी माँ भारती
"आज़ाद" दे बलिदान ऐसा, हर जगह आज़ादी संवारती

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विजय कुमार शर्मा  "आज़ाद"
ऍम. टेक., बी. टेक. (ऑनर्स)
गाँव सरभन्ना डाक सहार जिला बुलंदशहर (उ. प.)  

संपर्क
ईमेल vijay.buland@gmail.com, vijay.1786@yahoo.co.in

4 blogger-facebook:

  1. बेहतरीन! बहुत ही सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  2. ...आगे और लड़ाई शेष है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. /////////////////////////////////////////////
    आपने सही कहा है...चरित्र
    निर्माण के बिना सब अधूरा है।
    तप, त्याग, तप, शील संयम की
    आज सर्वाधिक आवश्यकता है।
    मानसिक गुलामी सबसे बडी़ गुलामी है....
    "एक गुलामी तन की है, एक गुलामी धन की है।
    इन दोनों से जटिल गुलामी बंधे हुए चिंतन की है॥"
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी12:24 pm

    भारतीयता का अहसास क्या तुम ख़ाक जानते हो
    अंग्रेजी बड़प्पन में बोली हिंदी को न पहचानते हो
    bahut khoob likhaa hai bhai

    उत्तर देंहटाएं

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