गुरुवार, 19 अगस्त 2010

महेन्द्र वर्मा की बाल कविता : कितना अच्छा होता

chotu

कितना अच्छा होता

सोमवार से शनि तक छुट्टी,

कितना अच्छा होता।

 

केवल रवि को शाला लगती,

कितना अच्छा होता।

 

सोमवार को खेल खेलते,

मंगल रहते बाग़ में,

बुध को घर पर महफिल जमती,

कितना अच्छा होता।

 

गुरु को चिड़ियाघर हो आते,

शुक्रवार को पिकनिक,

शनि टी वी पर फ़िल्में चलतीं,

कितना अच्छा होता।

 

पढ़ने तो जाते ही रवि को,

लेकिन यदि हो ऐसा,

सुबह से बारिश होती रहती,

कितना अच्छा होता।

 

कविता लिख झट भेजी मैंने,

छुपा-छुपा कर छपने,

पापा पढ़ लेते यदि इसको,

पता नहीं क्या होता।

 

.. महेन्द्र वर्मा, व्याख्याता, डाइट, बेमेतरा, जिला दुर्ग, छ.ग.

vermamahendra55@yahoo.in

(बाल भारती, नई दिल्ली दिसम्बर 1996 में पूर्व प्रकाशित)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------