शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

सुशील कालरा की हँसती मुस्कुराती पड़ताल – हँसी हाजिर हो

जाने माने कार्टूनिस्ट सुशील कालरा की किताब हँसी हाजिर हो में इस बात की पड़ताल की गई है कि हँसी क्या है, क्यों आती है, कब आती है. लेखक की जिज्ञासा थी, जिसके समाधान के लिए वो हँसी के क्षेत्र में काम कर रहे दुनिया के तमाम श्रेष्ठतम हस्तियों से मिला, प्राचीन-अर्वाचीन ग्रंथों का अध्ययन किया. मनोवैज्ञानिक चिंतकों के हास्य संबंधी विचारों का अध्ययन किया.

फलस्वरूप इस किताब का जन्म हुआ. अपनी किताब में सुशील हास्य के कई अनछुए पहलुओं को उजागर करने में सफल हुए हैं.

प्रस्तुत है किताब के आखिरी पन्ने में दिए गए भारतीय हास्य-व्यंग्यकारों के हास्य संबंधी काबिले जिक्र बयान…

  • हँसी का विश्लेषण लगभग मेंढक की चीर-फाड़ के बराबर है. चीरफाड़ के बाद आप यह तो जान जाएंगे कि इसके भीतर क्या है, लेकिन मेंढ़क तो मर ही जायेगा. – खुशवन्त सिंह
  • मुझे सिर्फ सेक्स-संबंधी चुटकुले ही पसंद हैं. दूसरे चुटकुलों में मेरी दिलचस्पी कम है. -खुशवन्त सिंह
  • सेंस ऑफ ह्यूमर ऐसा हथियार है जिससे केवल दुष्टता कटती है. –आर. के. लक्ष्मण
  • भरे पेट की हँसी और खाली पेट की हँसी में अन्तर होता है. – अबू अब्राहम
  • जहाँ चुनौती है वहाँ हास्य है, जहाँ चुनौती नहीं वहाँ जीवन भद्दा लगने लगता है. –आर. के. लक्ष्मण
  • हास्य एक प्रकार का समानता लाने का दृष्टिकोण है.  – अबू अब्राहम
  • शांतिकाल की बजाय मारकाट और युद्धकाल में बड़ीमात्रा में हास्य गठित किया गया है. –आर. के. लक्ष्मण
  • हास्य एक सुरक्षात्मक तत्व है. –आर. के. लक्ष्मण
  • आमतौर पर हास्य का दृष्टिकोण दयावान होता है – अबू अब्राहम
  • पंजाबी हास्य और मलयाली हास्य में अन्तर है. –अबू अब्राहम
  • ठहाके की गारण्टी कभी कोई नहीं ले सकता. आप एक मुस्कान की कोशिश कर सकते हैं. – शरद जोशी
  • ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ यदि समाज में न होती तो हम इतने वर्षों जिन्दा नहीं रहते. – शरद जोशी
  • मुझे उन पर तरस आता है जो हँस नहीं सकते. – मारियो मिराण्डा
  • गोल-मटोल औरतें मैं इसलिए बनाता हूँ कि वे कागज का काफी स्थान घेर लेती हैं. –मारियो मिराण्डा
  • जिस दिन बिना कठिनाई के आइडिया मिल जाता है वह दिन बड़ा खुशनसीब होता है. – मारियो मिराण्डा
  • हँसना मानव-विकास की आखरी पायदान है.-डॉ. एस. दत्ता रे
  • कार्टूनिस्ट का मन अक्सर हास्य की चिन्ताओं से घिरा रहता है. – मारियो मिराण्डा
  • जब मैं मजाकिया कार्टून बनाता हूँ तो अपने पर हँसने की प्रक्रिया में होता हूँ. –मारियो मिराण्डा
  • आम हिन्दुस्तानी आदमी ‘सेंस ऑफ़ ह्यूमर’ से ही जिन्दगी जीता है. – शरद जोशी
  • हास्य जीवन की पहली जरूरत है. – बिजी बी
  • हँसने के लिए व्यक्ति का मन सम्पन्न होना चाहिए. – बिजी बी
  • खूबसूरती की तरह हास्य चिर-स्थायी नहीं होता. – अमोल पालेकर
  • शराब ज्यादा पीने से भी हमारा हँसी पर नियन्त्रण खो जाता है. –डॉ. एस. दत्ता रे
  • हास्य का कोई भी सिद्धान्त अस्सी करोड़ दर्शकों पर एक-साथ खरा नहीं उतरता. – शरद दत्त
  • लबालब-भरा वजूद जब छलक पड़ता है, उसे हँसी कहते हैं. – मुज़्तबा हुसैन
  • हँसी एक कैफियत का नाम है. – मुज़्तबा हुसैन
  • हास्य में वैराग्य की कैफ़ियत होती है. – नरेन्द्र लूथर
  • मुझे पी. जी. वुडहाउस पर रश्क होता है! कैसे निरे हास्य से उनकी रचनाएँ लबालब होती हैं. –नरेन्द्र लूथर
  • जैसे फैशन पुराना होता है, इस तरह हास्य-टैक्नीक भी पुरानी पड़ जाती है. –नरेन्द्र लूथर
  • हास्य ‘टॉपिकल’ मसलों से जुड़ा होता है, जबकि संजीदा साहित्य बुनियादी मसलों से. –नरेन्द्र लूथर
  • हँसने के लिए इरादों का पाक-साफ़ होना निहायत जरूरी है. –शेरजंग गर्ग
  • हँसी विसंगति पर ही नहीं, विसंगति की सद्गति पर भी आती है. –शेरजंग गर्ग
  • हँसना रोने से कहीं जरूरी है. -शरद दत्त

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हँसी हाजिर हो से साभार

हँसी हाजिर हो

सुशील कालरा

प्रकाशक – पुस्तकायन – 2/4240ए, अंसारी रोड, नई दिल्ली 110002

3 blogger-facebook:

  1. जिंदगी आजकल 'मजाल' कुछ कुछ गुमसुम हो गयी,
    हसीं आने से पहले, सोच में कहीं गुम हो गयी.

    उत्तर देंहटाएं
  2. मनोहर श्‍याम जोशी कहते हैं - 'कितना हास्‍यास्‍पद है ये त्रास और कितना त्रासद है ये हास्‍य.

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  3. देकें- चले गये सुशील कालरा http://www.cartoonnewshindi.blogspot.in/2013/09/blog-post_12.html

    उत्तर देंहटाएं

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