सोमवार, 23 अगस्त 2010

रामदीन की कविता - कहीं अगर बी.एन. (भारत निर्माता) बन जाता

Ram Deen 001

अर्धसत्‍य

कहीं अगर बी.एन. (भारत निर्माता) बन जाता

भारत देश महान हमारा, इसका मैं अहसास कराता।

कहाँ छुपी है ताकत इसकी, इस ख्‍याल में मैं रम जाता॥

देश चमत्‍कारी है अपना, सभी जगह है यहाँ विधाता।

कुछ तो मूर्ति-पत्‍थरों में है, कुछ है स्‍वयंभू जग निर्माता॥

कहीं अगर बी.एन. बन जाता

 

सारी शक्ति, समर्थन से मैं, सर्वप्रथम इनके ढिंग जाता।

इन सबको नत मस्‍तक होता, हाथ जोड़ता पैर पकड़ता॥

बड़ी खुशामद और दरामद करके इनकी विनती करता।

अजर अमर पत्‍थर देवों और चेलों की भी सेवा करता॥

कहीं अगर बी.एन. बन जाता

 

मान मनौबल करके उनको देश की सीमा पर ले जाता।

इनके साथ खड़े होकर के सारी फौज तुरन्‍त हटाता॥

सरहद पर आगे कर इनको सेना इनके पीछे करता।

शत्रु की तोप बमों के आगे अपने देवों को टकराता॥

कहीं अगर बी.एन. बन जाता

 

एक एक दुश्मन पर भारी अपना देव सरासर होता।

देश सुरक्षित फिर हो जाता, दुश्मन का कही पता न रहता॥

देश हमारा आगे बढ़ता, दुनिया को फिर धता बताता।

अगर देव या स्‍वामी कोई सीमा पर कायरता करता॥

कहीं अगर बी.एन.जन जाता

 

पीछे खड़ी फौज अपनी से उसकी चमड़ी फिर नुचवाता।

ऐसे झूठे गद्‌दारों को सरहद पर नंगा टंगवाता॥

तथा कथित इन भगवानों से भारत को आजाद कराता।

भोली भाली निज जनता को शैतानों से मुक्‍त कराता॥

कहीं अगर बी.एन. बन जाता

----

 

-रामदीन

जे-431, इन्‍द्रलोक कालोनी, कृष्णा नगर, लखनऊ

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------