गुरुवार, 5 अगस्त 2010

शरद जायसवाल की कविताएँ

clip_image002

(पत्रकार निरुपमा पाठक की मां को जमानत )

मां
बेटी के रिश्ते में
खटास रही होगी !
हवा
बदहवास
बही होगी !!
--

आंसू

बह रहे होते

हलक

जब सूखने लगता !

वही

चुल्‍लु से

पानी दे

पीठ पे हाथ फेरे वो !!

----

SHARAD JAISWAL,KATNI M.P. M.9893417522

2 blogger-facebook:

  1. उफ़ ………………सारी पीडा को चंद शब्दों मे लपेट दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. हवा बदहवास बह रही होगी, मां बेटी के रिश्ते में खटास रही होगी। बेहतरीन पक्तियां

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------