शरद जायसवाल की कविताएँ

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(पत्रकार निरुपमा पाठक की मां को जमानत )

मां
बेटी के रिश्ते में
खटास रही होगी !
हवा
बदहवास
बही होगी !!
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आंसू

बह रहे होते

हलक

जब सूखने लगता !

वही

चुल्‍लु से

पानी दे

पीठ पे हाथ फेरे वो !!

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SHARAD JAISWAL,KATNI M.P. M.9893417522

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2 टिप्पणियाँ "शरद जायसवाल की कविताएँ"

  1. उफ़ ………………सारी पीडा को चंद शब्दों मे लपेट दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. हवा बदहवास बह रही होगी, मां बेटी के रिश्ते में खटास रही होगी। बेहतरीन पक्तियां

    उत्तर देंहटाएं

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