शनिवार, 14 अगस्त 2010

हरेन्द्रसिंह रावत की स्वतंत्रता दिवस रचनाएँ

स्वतंत्रता दिवस २०१०

पिछले ६३ सालों से,

कुछ काले कुछ सफेद बालों से,  

लेकर तिरंगे को

लाल किले की प्राचीर पर,

लहर लहर लहराने को,

हर साल हर बार प्रधान मंत्री

शासक प्रशासक,

मंत्रियों का दल

सुरक्षा को इनकी

सुरक्षा बल !

सैनिक टुकड़ी,

प्रधान मंत्री को

सेलयूट देती है,

जनता खुश होकर ताली बजा लेती है !

 

फिर लंबा चौड़ा भाषण,

माओवाद, आतंकवाद का ख़ात्मा,

स्वर्ग में सुखी रहे शहीदों की आत्मा !

महँगाई हटेगी,

चीनी चावल मुफ़्त बँटेगी !

सबको नौकरी मिलेगी,

ग़रीबी रेखा और ऊँची उठेगी !

वरिष्ट नागरिकों की हिफ़ाज़त होगी,

हर क्रिमिनल नेता की सुरक्षा बढ़ेगी !

 

कामचोर, रिश्वतखोर, हत्यारे, अपराधी,

सरकार से हटाए जाएँगे,

उनके बीबी बच्चे उनका स्थान पाएँगे !  

रोटी कपड़ा मकान हर ग़रीब को दिलाएँगे,

झुग्गी झोपड़ी हटा कर मल्टी स्टोरी बनाएँगे ! 

हर भ्रष्टाचारी नेता को सबक सिखाएँगे, 

काले धन से उसका बैंक बैलेंस बढ़ाएँगे ! 

हम देश को हर क्षेत्र में ऊँचा उठाएँगे

की अगले दस सालों में

हम विश्व में नंबर वन कहलाएँगे !

 

बंदे मातरम का गीत गाया जाता है,

किसी किसी को साँप सूंघ जाता है !

इसी तरह स्वतंत्रता दिवस हर साल आता है,

हर्ष उल्लास के साथ इसी तरह मनाया जाता है !! 

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लघुकथा

आज़ादी

एक बड़ा नेता, बड़ी बड़ी मूँछ वाला नेता, ऊँची नाक वाला नेता १५ अगस्त का तिरंगा झंडा लहराने के लिए परेड करने वाले जवानों से सलूट लेने के लिए जा रहा था, एक मंहगी कार में !

उसकी कार के आगे एक बूढ़ा असमर्थ लाचार भूखा आदमी आ खड़ा हुआ, दो रोटी के लिए पैसे माँगने लगा, "बाबू जी दो दिन से भूखा हूँ, दो रोटियों का जुगाड़ कर दीजिए"

नेता आग बाबूला हो गये, सुरक्षा गार्ड को बुलाकर कहने लगे,"इसे भगाओ" !

उसी समय सामने चार जवान लड़के नारे लगाते हुए सामने आ गए, "नेता की हाय हाय, देश भूखमरी, मंहगाई से गुजर रहा है और, ये जनता के पैसो पर ऐस कर रहे हैं, क्या इसी को आज़ादी कहते हैं ?"

नेता ने सुरक्षा गार्ड को बुलाया और कहा, "इन्हें पटाओ" !

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( हरेन्द्रसिंह रावत यू एस ए )

2 blogger-facebook:

  1. कविता और लघुकथा दोनों ही करारा व्यंग करती है| सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये|

    उत्तर देंहटाएं
  2. दोनों रचनाएँ सटीक ...

    स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं

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