गुरुवार, 26 अगस्त 2010

अवनीश सिंह चौहान की पुस्तक समीक्षा : अधूरा सच – रमाकांत दीक्षित का कहानी संग्रह

समीक्षित कृति-‘अधूरा सच‘ – कहानी संग्रह

कथाकार – रमाकांत दीक्षित

आज के महानगरीय जीवन का सत्‍य

अवनीश सिंह चौहान

‘साहित्‍य सम्‍पूर्ण सामाजिक अस्‍तित्‍व की अभिव्‍यक्‍ति है। हमारा आज का जीवन न सम्‍पूर्ण है, न सामाजिक, न सच्‍चे अर्थों में जीवन है, तब इसकी अभिव्‍यक्‍ति सम्‍पूर्ण कैसे हो?‘ (जगदीश चन्‍द्र माथुरः ‘भोर का तारा‘) शायद इसीलिए रमाकांत क्षितिज अपनी पन्‍दह कहानियों के संग्रह का शीर्षक ‘अधूरा सच‘ रखते हैं और इस बात को बड़ी ही साफगोई से स्‍वीकारते लगते हैं कि सच चाहे गढ़ा हुआ हो या कि जिया हुआ, अभिव्‍यक्‍ति में हमेशा कुछ न कुछ छूट ही जाता है कभी संघर्ष सूत्रों को ठीक से याद न रख पाने के कारण, तो कभी वैचारिकी पर पड़ने वाले परिस्‍थिति जन्‍य पभावों के चलते फिर भी इस अधूरे सच के प्रकाशन से आज के महानगरीय जटिल जीवन संदर्भो को बारीकी से व्‍यक्‍त करने की सामर्थ्‍य रखने वाले इस नवोदित कथाकार की रचना प्रक्रिया बड़ी ही सहजता, तारतम्‍यता एवं पारदर्शिता से कहानी चोला पहनती है और अपने कथ्‍य की विशिष्‍टता एवं विश्‍वसनीयता के बल पर पाठकों को झकझोर कर रख देती है।

आज ‘रेसिंग‘ का दौर है, तेज दौड़ती जिंदगी पर सबकी नजर है। और इस दौड़ में आगे निकल जाने की होड़ में जाने कितने लोग पीछे छूट जाते हैं, उनकी ओर मुड़कर देखने की फुर्सत भी नहीं होती है हमारे पास। ऐसे पिछड़े लोगों की लाइफ ट्रेन पटरी पर है भी या नहीं, इस ओर भी हमारा ध्‍यान नहीं जा पाता। किंतु जब कोई कलमकार इन उपेक्षित एवं पीड़ित लोगों की कुछ दुखद स्‍थितियों से संवेदित होकर उन्‍हें शब्‍द देता है तो निश्‍चय ही उस शब्‍द-शिल्‍पी के साहस और सजगता की सराहना की जानी चाहिए। ऐसे ही सहजग एवं संवेदनशील कथाकार रमाकांत क्षितिज आम और बदनाम जीवन और उससे जुड़ी तमाम बातों को बड़ी बेबाकी से व्‍यंजित करते हैं अपने इस रचना संसार में। उनकी ये कहानियां आजादी के बाद के बदले भारतीय समाज की असंगतियों-असमानताओं को अपने छोटे से फलक पर इतनी कलात्‍मकता से उकेरती है कि इनके शब्‍द-चित्र, घटनाएं, पात्र जीवन्‍त हो उठते हैं और लगने लगता है कि भारतीय समाज के नवीन खांचे में बहुत कुछ परिवर्तन की आवश्‍यकता है और जब तक यह परिवर्तन, परिर्वधन नहीं होता तब तक मनुष्‍य की पीड़ा को कम से कम कर एक सुखद एवं संस्‍कारित समाज की रचना का सपना, सपना ही रहेगा।

सामाजिक कहर, वर्तमान एवं भविष्‍य के खतरों से घिरी बचपन में ही अनाथ होने वाली फटपाथी जीवन जीती भिखारिन बच्‍ची रमिया की बेहद दुखद कहानी से प्रांरंभ होता है यह कहानी संग्रह। कातर दो ऐसे युवा प्रेमियों की भावनाओं को प्रकट करती है जो अलग-अलग वर्ण के होने के कारण एक दूसरे से वैवाहिक संबंधों में बंधने का साहस नहीं जुटा पाते। भस्‍मासुर कहानी उन लोगों पर करारा व्‍यंग्‍य है जिन्‍हे बड़े विश्‍वास से अपने समाज का प्रतिनिधित्‍व करने का जिम्‍मा सौंपा गया था किंतु जिन्‍होंने स्‍वार्थों के वशीभूत होकर अपनों के साथ ही विश्‍वासघात करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। साइड इफेक्‍ट कहानी पाश्‍चात्‍य जीवन श्‍ौली की देखा-देखी भारतीय परिवेश में अप्राकृतिक लेसवियन संबंधों के कटु अनुभवों की ओर संकेत करती है तो परिवर्तन कहानी में राहुल और मान्‍यता प्रेम में एक साथ जीने-मरने की बातें तो करते हैं किंतु विवाह किसी और से रचाकर अलग-अलग घर बसा लेते हैं। इस प्रवृत्‍ति से आधुनिक पीढ़ी की जियो और मौज करो की मानसिकता परिलक्षित होती है। मीठा जहर कजहरी जैसी सैक्‍स कर्मियों एवं सुनील जैसे परदेश में अकेले रहने, खाने-कमाने वाले अति सामान्‍य लोगों की बेवसी एवं बदहाली में जानलेवा बीमारियों का शिकार हो जाना बढ़ते महानगरीय संत्रास को उद्‌घाटित करती है। जबकि निपंग महानगरीय गुण्‍डागर्दी को सारी रोगी को ठीक न कर पाने की स्‍थिति में डॉक्‍टर द्वारा इस शब्‍द से अपनी असमर्थता जताने का आसान तरीके को, कांच की चूड़ियां दाम्‍पत्‍य जीवन की कड़ुवाहट को, हाथी का दांत, दहेज की दानवी प्रवृत्‍ति को 9ः14 सी.एस.टी. लोकल ट्रेन में सफर करने वालों की दैनिक दास्‍तान को, खोइया वृद्धों की दारूण दशा को, अधूरा सच प्रशासन, खासकर पुलिस मकहमे की कलाई खोलने के प्रयास को तथा अंतिम कहानी छब्‍बीस जुलाई प्राकृतिक प्रकोप का शिकार हुए मुंबई-वासियों की पीड़ा को रूपायित करती है। हालांकि इस संग्रह की कुछ कहानियों की बुनावट एवं उनका कथानक कमजोर है फिर भी उनमें भरपूर ताजगी एवं सरसता विद्यमान है। कुल मिलाकर इस संग्रह की कहानियां जीवन को हर हाल में शिद्‌दत से जीने का संकेत तो करती ही हैं, विषम स्‍थितियों से जूझने और उनका निदान खोजने के लिए उकसाती-जगाती है उन लोगों को जिनके हृदय में पीड़़ितों के प्रति सहानुभूति एवं दया के स्‍वर स्‍पंदित होते हैं।

-अवनीश सिंह चौहान

चन्‍द्रपुरा निहाल सिंह

जिला-इटावा

(डाॅ. रमाकांत क्षितिज ‘अधूरा सच‘, शिवा प्रकाशन

निकट आइडियल स्‍कूल, लेक रोड भांडुप (पं0)

मुंबई-400078, पथ आवृत्‍ति-2008, मूल्‍य-रु.100/-,पृष्‍ठ-151,

---

समीक्षक परिचय:
अवनीश सिंह चौहान
जन्म : 4 जून, 1979, चन्दपुरा (निहाल सिंह), इटावा (उत्तर प्रदेश) में
पिता का नाम : श्री प्रहलाद सिंह चौहान
माताका नाम : श्रीमती उमा चौहान
शिक्षा : अंग्रेज़ी में एम०ए०, एम०फिल० एवं पीएच०डी० (शोधरत्) और बी०एड०
प्रकाशन: अमर उजाला, देशधर्म, डी एल ए, उत्तर केसरी, प्रेस-मेन, नये-पुराने, गोलकोण्डा दर्पण, संकल्प रथ, अभिनव प्रसंगवश, साहित्यायन, युग हलचल, यदि, साहित्य दर्पण, परमार्थ, आनंदरेखा, आनंदयुग, कविता कोश डॉट कॉम, सृजनगाथा डॉट कॉम, साहित्य शिल्पी डॉट कॉम, हिन्द-युग्म डॉट कॉम, रचनाकार ब्लागस्पाट डॉट कॉम, पी4पोएट्री डॉट कॉम, पोयमहण्टर डॉट कॉम, पोएटफ्रीक डॉट कॉम, पोयम्सएबाउट डॉट कॉम, आदि हिन्दी व अंग्रेजी की देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में आलेख, समीक्षाएँ, साक्षात्कार, कहानियाँ, कविताओं एवं नवगीतों का निरंतर प्रकाशन। साप्ताहिक पत्र ‘प्रेस मेन’, भोपाल, म०प्र० के ‘युवा गीतकार अंक’ (30 मई, 2009) तथा ‘मुरादाबाद के प्रतिनिधि रचनाकार’ (2010) में गीत संकलित. मेरी शाइन (आयरलेंड) द्वारा सम्पादित अंगरेजी कविता संग्रह 'ए स्ट्रिंग ऑफ़ वर्ड्स' में रचनाएँ संकलित.
प्रकाशित कृतियाँ: स्वामी विवेकानन्द: सिलेक्ट स्पीचेज, किंग लियर: ए क्रिटिकल स्टडी, स्पीचेज आफ स्वामी विवेकानन्द एण्ड सुभाषचन्द्र बोस: ए कॅम्परेटिव स्टडी, ए क्विन्टेसेन्स आफ इंग्लिश प्रोज (को-आथर), साइलेंस द कोर्ट इज इन सेशन: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर), फंक्शनल स्किल्स इन लैंग्वेज एण्ड लिट्रेचर, ए पैसेज टु इण्डिया: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर)
अप्रकाशित कृतियाँ : एक नवगीत संग्रह, एक कहानी संग्रह तथा एक गीत, कविता और कहानी से संदर्भित समीक्षकीय आलेखों का संग्रह आदि
अनुवाद: अंग्रेजी के महान नाटककार विलियम शेक्सपियर द्वारा विरचित दुखान्त नाटक ‘किंग लियर’ का हिन्दी अनुवाद भवदीय प्रकाशन, अयोध्या से प्रकाशित ।
संपादन :
प्रख्यात गीतकार, आलोचक, संपादक श्री दिनेश सिंहजी (रायबरेली, उ०प्र०) की चर्चित एवं स्थापित कविता-पत्रिका ‘नये-पुराने’ (अनियतकालिक) के कार्यकारी संपादक पद पर अवैतनिक कार्यरत।
प्रबुद्ध गीतकार डॉ०बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून) की रचनाधर्मिता पर आधारित उक्त पत्रिका का आगामी अंक शीघ्र ही प्रकाश्य। वेब पत्रिका ‘गीत-पहल’ के समन्वयक एवं सम्पादक ।
सह-संपादन: कवि ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग’ अभिनंदन ग्रंथ (2009) के सह-संपादक ।
संपादन मण्डल: प्रवासी साहित्यकार सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) अभिनंदन ग्रंथ (2009) के सम्पादक मण्डल के सदस्य ।
सम्मान :
अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, मुरादाबाद (उ०प्र०) से ब्रजेश शुक्ल स्मृति साहित्य साधक सम्मान, वर्ष 2009
संप्रति :
प्राध्यापक (अंग्रेज़ी)
स्थायी पता: ग्राम व पो.- चन्दपुरा (निहाल सिंह), जनपद-इटावा (उ.प्र.)-२०६१२७, भारत ।
मोबा० व ई-मेल: 09456011560, abnishsinghchauhan@gmail.com
--
Abnish Singh Chauhan
Lecturer
Department of English
Teerthanker Mahaveer University
Moradabad (U.P.)-244001
*****************************************************
Web Info: www.printsasia.com/BookDetails.aspx?Id=882727714
www.marelibri.com/topic/39-main/books/AUTHOR_AZ/2200
bhavdiya.com/book_detail.php?cat_id=english&&id=161
www.dkagencies.com/doc/from/1023/.../MicroSubjectDetails.html
www.poemhunter.com/abnish-singh-chauhan/
www.poemsabout.com/poet/abnish-singh-chauhan/
http://www.completeclassics.com/p/m/poem.asp?poem=22816623&poet=1036823&num=4&total=6
http://www.completeclassics.com/p/m/poem.asp?poem=22847650&poet=1036823&num=1&total=6
profiles.tigweb.org/abnishsingh
afewlittlebooks.com/biographical poetfreak.com/poet/AbnishSinghChauhan
www.articlesbase.com/.../formative-influence-of-swami-vivekananda-on-subhash-chandra-bose-a-biographical-study-2157719...
http://www.actionfigureshq.info/tag/chandra/
http://www.articlesbase.com/literature-articles/social-exclusion-and-exploitation-in-mulk-raj-anand039s-untouchable-a-subaltern-study-2227611.html
http://www.professionalencouragers.info/father-of-the-career-guidance-movement/
http://www.bluemoonpiano.com/monster-cit/
http://kavita.hindyugm.com/2010/05/jalati-samidhayen.html
http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%B6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9_%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8
http://purava.webs.com
http://geetpahal.webs.com/home.htm

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------