गुरुवार, 12 अगस्त 2010

एस. के. पाण्डेय की हास्य व्यंग्य कविता - कुत्ते

कुत्ते

                 (१)

पहन गले में सुंदर हार ।

कुतिया सजिके चली बजार ।।

इधर-उधर में हो गयी शाम ।

सोचा चल दूँ अपने धाम ।।

            (२)

एक कुत्ते की पड़ी नजर ।

आकर बोला कहो खबर ।।

कुतियाजी तू चली किधर ।

साथ चलूँ ना कोई डर ।।

करना कुछ भी नहीं फिकर ।

उसी ओर है मेरा घर ।।

         (३)

रास्ते में किया उसने वार ।

लेकर भागा सुंदर हार ।।

घूम रही थी क्यों बेकार ?

कुतिया  रोये  करे  विचार ।।

          (४)

कोई बोला बोलो राम ।

जाओ अब तुम अपने धाम ।।

कुत्ते घूमें यहाँ तमाम ।

सोच समझ के करिए काम ।।

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डॉ. एस. के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

URL : http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

4 blogger-facebook:

  1. ये रचनाएँ, ये मिजाज,
    मेनका गांधी का तो करें लिहाज!

    उत्तर देंहटाएं
  2. vah janaav jaise aap saath saath chal rahe the. achchhaa byang, badhaaee. harendrarawat

    उत्तर देंहटाएं
  3. कुत्ते बहुत हैं..सोच समझ के करिए काम ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. baijnathsharma5:24 pm

    ji ha sir
    chor kutton ki sankhya dino-din badhati ja rahi hai

    उत्तर देंहटाएं

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