बुधवार, 25 अगस्त 2010

अशोक कुमार पाण्डेय 'अशोक' की पुस्तक समीक्षा : जन जीवन से जुडी काव्यकृति : काव्य मुक्तामृत

पुस्तक - काव्य मुक्तामृत( अतुकांत काव्य संग्रह ),   रचनाकार ---डा श्याम गुप्त , प्रकाशक--अ.भा.अगीत परिषद् , लखनऊ समीक्षक --अशोक कुमार पाण्डेय 'अशोक'

जन जीवन से जुडी काव्यकृति : काव्य मुक्तामृत

समीक्ष्य कृति में ३१ नयी कवितायें संग्रहीत हैं। स्वच्छ रूप से विचारों की अभिव्यक्ति में छंदों को बाधक मानने वाले साहित्यकारों के वर्ग विशेष ने छंदानुशासन , काल्पनिक उद्भावनाओं एवं अलंकारिक साज सज्जाओं से अलग हट कर जिन छंद मुक्त , अतुकांत रचनाओं का प्रणयन किया उसे नई कविता की संज्ञा प्राप्त हुई। नई कविता मुख्य रूप से यथार्थ पर आधारित एक वैचारिक , चिंतन परक दृष्टिकोण उपस्थित करती है। जिसमें गरीब, बेसहारा विशेषकर कल कारखानों , मीलों आदि में कार्यरत श्रमिकों के प्रति होरहे शोषण व अन्याय के विरुद्ध विद्रोही स्वर मुखरित हुए। काव्य मुक्तामृत ऐसी ही एक चिन्तनपरक रचनाओं का स्तवन है। इस कृति में समाज में व्याप्त विसंगतियों एवं विद्रूपताओं , गरीबी, बेबसी, परिस्थितिजन्य समस्याओं से ग्रसित मानव मस्तिष्क , स्वार्थपरता , आज के भ्रष्ट नेताओं का चरित्र तथा अधिकारियों के कारनामों का यथार्थ चित्रण दृष्टव्य है।

काव्य मुक्तामृत  के रचनाकार डा श्याम गुप्त अपने कवि धर्म के प्रति सजग दिखते हैं। उन्होंने सभी बिन्दुओं पर निर्भीकता पूर्वक अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है , जो समाज की उन्नति , विकास, एकता एवं भाईचारे में बाधक है।

कवि अपनी लेखनी से देश प्रेम की अलख जगाना चाहता है, साथ ही यह भी चाहता है कि जन मानस की करुणा,मसि बनकर उसकी लेखनी में भरजाए। देखिये वन्दना रचना की कुछ पंक्तियाँ --

'देश प्रेम की अलख जगे मन,

राष्ट्र धर्म की प्रीति पग़े मन,

जन मानस की करुणा की मसि,

बहे लेखनी से , यह वर दो।"

समाज की रूढ़ियों एवं अंधविश्वासों को समाप्त कर सदैव सत्य को स्थापित करना क्रांतिकारियों एवं महापुरुषों का दायित्व रहा है। लीक से हटकर मार्ग में आने वाली समस्त बाधाओं को ध्वस्त करके आगे बढ़ अपने लक्ष्य को प्राप्त करना सच्चे क्रांतिकारी की निशानी है। प्रस्तुत है 'सत्य मार्ग ' शीर्षक रचना की कुछ पंक्तियाँ --

"क्रान्तिदर्शियों को लीक से हटकर ,

सत्य के लिए टकराव का,

अतिवादी, आदर्शवादी , कठोर

मार्ग ही भाता है....।"

देश की जो प्रगति कवि देख रहा है उससे वह संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसकी दृष्टि में यह वास्तविक प्रगति नहीं है। ' हमने बड़ी प्रगति की है ' शीर्षक रचना में कवि कहता है--

"आज सभी कार्य

चन्दा या फंड मांग कर किये जारहे हैं|

यहाँ तक कि संस्थानों के लिए भी

अमेरिका से फंड दिए जारहे हैं

हमारी भावी पीढी को,

स्वावलंबी की बजाय,

परावलंबी बनाए जारहे हैं;

क्योंकि हम प्रगति की ओर जारहे हैं।"

आज महलों में बैठकर झौंपडी का भविष्य लिखने वालों की कमी नहीं है| गरीब जनता का दुःख दर्द निवारण के लिए किस प्रकार किया जाता है "मेरा देश '' शीर्षक में देखिये--

जहां कुछ प्रबुद्ध लोग,

मलेरिया पर

पंचतारा होटल में गोष्ठियां करते हैं ;

वहीं कूड़े के ढेर में,

मलेरिया के कीटाणु-

बेखौफ पलते हैं।"

उपर्युक्त उदाहरणों से ज्ञात होता है कि डा श्याम गुप्ता ने यथार्थ की भाव भूमि पर अपनी आतंरिक अनुभूतियों को व्यक्त किया है| समस्त रचनाएँ जन जीवन से जुडी हैं। समाज में व्याप्त विद्रूपताओं एवं देश की उन्नति में बाधक प्रवृत्तियों के प्रति विद्रोही स्वर मुखरित करने वाली "काव्य मुक्तामृत" की रचनाएं पठनीय हैं।

                                  -----प्रस्तुति---डा श्याम गुप्त

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------