बुधवार, 22 सितंबर 2010

मुमताज़ एवं टी एच खान कविताई जुगलबंदी – प्यार का रंग

pyar ka rang

(प्रस्तुत कविता मुमताज एवं टी. एच. खान (पति-पत्नी) द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है. )

 

आखिर में सिर्फ़ प्यार ऐसा रंग दिखाता है,

परिवार को अपने, सुखी परिवार बनाता है।

 

दूर हो जाती है हर मुसीबत हँसते - हँसते

छँटता है अँधेरा, उजाला जगमगाता है।

 

कभी तोड़ सकता नहीं कोई इस घरौंदे को,

भाग्य अपना वो, इस तरह मिलके बनाता है।

 

साथ हो ही जाता है जनम -जनम का इस तरह,

वियोग एक पल का भी, इस मन को तड़पाता है।

 

ज़िन्दगी में बिना प्यार के आती नहीं खुशबू

लहलहाता हुआ मन का गुलशन मुरझाता है।

 

मतभेद हों दूर सबके ये हमारी दुआ है,

त्याग दें हम वो ख़्याल, जो दूरियाँ बढ़ाता है।

-0-

प्रस्तुति – रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

4 blogger-facebook:

  1. bahut khub janab
    bahut achhi abhivykti ki hai
    dhanyvad
    deepti sharma

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी कविता ,इन्हीं कुछ बातों को सकेतों के माद्ध्यम से कहा याये तो और अच्छी लगेगी।

    उत्तर देंहटाएं

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