शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

योगेन्‍द्र वर्मा ‘व्‍योम' की ग़ज़लें

yogendra vyom

ग़ज़ल

आज फिर अख़बार की ये सुर्खियाँ हैं ।

गाँव सहमे-से डरी-सी बस्‍तियाँ हैं ॥

 

कह रहा है ज्‍वार भाटा सिंधु से यह ।

अब सफ़र में और कितनी क़िश्‍तियाँ हैं ॥

 

रात भर रोयी सुबककर चाँदनी यूँ ।

अश्‍क़ हाथों में सहेजे पत्तियाँ हैं ॥

 

मृत्‍यु भी तो जन्‍म का इक रूप ही है ।

सोच अपनी और अपनी दृष्‍टियाँ हैं ॥

 

चिट्ठियाँ तो हो गईं हैं गुमशुदा अब ।

याद करने को बचीं बस हिचकियाँ हैं ॥

 

आज कुहरे का लगा दफ़्‍तर सुबह से ।

धूप की खारिज हुईं सब अर्जि़याँ हैं ॥

 

फूल बम बिस्‍फोट में जबसे जले कुछ ।

‘व्‍योम' दहशत में तभी से तितलियाँ हैं ॥

 

ग़ज़ल

अब किसी घर में न कोई तीरग़ी क़ायम रहे ।

हो यही कोशिश सभी की रोशनी क़ायम रहे ॥

 

हर तरफ छाया हुआ है खौफ का कुहरा घना ।

है ज़रूरी अम्‍न की अब धूप भी क़ायम रहे ॥

 

ज़िन्‍दगी में साथ हैं परछाइयों सी उलझनें ।

पर हमेशा हौंसलों में ज़िन्‍दगी क़ायम रहे ॥

 

हो बुज़ुर्गों की दुआओं का असर कुछ इस तरह ।

हम तरक़्‍की भी करें तहजीब भी क़ायम रहे ॥

 

गीत लिख या फिर ग़ज़ल लेकिन हमेशा ध्‍यान रख ।

‘व्‍योम' तेरी शायरी में ताज़गी क़ायम रहे ॥

 

ग़ज़ल

बताता है हुनर हर शख्‍़स को वह दस्‍तकारी का ।

ज़रूरतमंद की इस शक्‍ल में इमदाद करता है ॥

 

कमाता है हमेशा नेकियाँ कुछ इस तरह से वो ।

परिन्‍दों को कफ़स की क़ैद से आज़ाद करता है ॥

 

कहा उसने कभी वो मतलबी हो ही नहीं सकता ।

मगर तकलीफ़ में ही क्‍यों ख्‍़ाुदा को याद करता है ॥

 

कभी-भी कामयाबी ‘व्‍योम' उसको मिल नहीं सकती ।

हक़ीकत जानकर भी वक़्‍त जो बरबाद करता है ॥

 

ग़ज़ल

अर्श छूने की अगर तुझ में प्रबल है कामना ।

तो नये पावन सपन मन में सखे तू पालना ॥

 

राह जीवन की कँटीली और तम से हो भरी ।

हाथ तब तू हौंसले के जुगनुओं का थामना ॥

 

दी तुझे छाया सदा ही पंथ में जिस पेड़ ने ।

तू कभी भी स्‍वार्थवश उस पेड़ को मत काटना ॥

 

जातियों के धर्म के झगड़े मिटाकर आपसी ।

आज सब मिलकर करें हम राष्‍ट्र की आराधना ॥

 

ज़िन्‍दगी संघर्ष का ही नाम तो है दूसरा ।

जूझ इनसे ‘व्‍योम' डर मत कर हमेशा सामना ॥

--

नाम : योगेन्‍द्र कुमार वर्मा

साहित्‍यिक नाम : ‘व्‍योम'

पिता का नाम : स्‍व0 श्री देवराज वर्मा

जन्‍मतिथि : 09ण्‍09ण्‍1970

शिक्षा : बी.कॉम.

सृजन : गीत, ग़ज़ल, मुक्‍तक, दोहे, कहानी, संस्‍मरण आदि

कृति : इस कोलाहल में (काव्‍य-संग्रह)

प्रकाशन : प्रमुख राष्‍ट्रीय समाचार पत्रों, साहित्‍यिक पत्रिकाओं

तथा अनेक काव्‍य-संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन

प्रसारण : आकाशवाणी रामपुर से अनेक बार कविता कार्यक्रम

प्रसारित

सम्‍प्रति : लेखाकार (कृषि विभाग, उ0प्र0)

विश्‍ोष : संयोजक - साहित्‍यिक संस्‍था ‘अक्षरा' , मुरादाबाद

सम्‍मान : काव्‍य संग्रह ‘इस कोलाहल में' के लिए भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास

लखनऊ द्वारा ‘पं0 प्रताप नारायण मिश्र स्‍मृति सम्‍मान-2009'

पत्राचार एवं स्‍थायी पताः ।स्‍.49, सचिन स्‍वीट्‌स के पीछे, दीनदयाल नगर फेज़-प्रथम्‌,

काँठ रोड, मुरादाबाद-244001 (उ0प्र0)

ई-मेल : vyom70@yahoo.in

- योगेन्‍द्र वर्मा ‘व्‍योम'

।स्‍.49, सचिन स्‍वीट्‌स के पीछे,

दीनदयाल नगर फेज़-प्रथम्‌

काँठ रोड, मुरादाबाद(उ0प्र0) चलभाष-941280598

1 blogger-facebook:

  1. "हम तरर्क्की भी करें तहज़ीब भी क़ायम रहे"। सभी ग़ज़लियात मुकम्मल और उच्च स्तर के लगे। रचनाकार को बधाइ।

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