रविवार, 26 सितंबर 2010

दीनदयाल शर्मा की हास्य कविताएँ - चिकोटियाँ

Rajasthani Hindi child writer Deendayal Sharma. 1 JPG

चिकोटियां / दीनदयाल शर्मा

 

खत्म होने लगा सैंस

जिसकी लाठी उसकी भैंस।

 

गिर गए दाम

आँधी के आम।

 

खत्म होने से ना डर

चींटी के आ गए पर।

 

रहा बात पे अड़ा

चिकना घड़ा।

 

धन बना न दूना

लगा गया चूना।

 

बातों का कहर

उगले जहर।

 

शक है लाला

दाल में काला।

 

मत बन होशियार

पंख मत मार।

 

बिक गए बाट

उलट दी टाट।

 

नहीं है अनाड़ी

पेट में दाढ़ी।

 

पुलिस ने डंडे मारे

दिन में दिख गए तारे।

 

पेट दिखा बाई

मैं मौहल्ले की दाई।

 

होगा वही जो होना

घोड़े बेचकर सोना।

 

मिल गई गोटी

हाथ में चोटी।

 

जीत गया जवान

जान में आ गई जान।

 

बेमतलब ना बोल

जुबान को तौल।

 

जीत ली लंका

बज गया डंका।

 

मत कर रीस

दाँत पीस।

 

ऐसे मत कुलबुला

पानी का बुलबुला।

 

मिट गए ठाट

अब पेट काट।

 

दोस्ती तगड़ी

बदल ली पगड़ी।

 

मंत्री बना लल्ला

पकड़ लिया पल्ला।

 

मान ली हार

डाले हथियार।

 

नहीं करना काम

सुबह-शाम, सुबह-शाम।

 

मीचे अक्खियां

मारे मक्खियां।

 

अब मत हो लाल

बासी कढ़ी में उबाल।

 

चल गई चाल

गल गई दाल।।

---

अध्यक्ष, 

राजस्थान साहित्य परिषद्,

हनुमानगढ़ संगम-335512

7 blogger-facebook:

  1. दीनदयाल चिकोटियां
    स्‍टफ्ड डबलरोटियां

    उत्तर देंहटाएं
  2. deendayal chikotiya
    hasy ki chhaiya chhaiya
    khatm hone laga sense
    dharm ke nam par aakhir
    kab tak chalega non sense
    nahi gire kisi ke daam
    khatte angoor, phike aam

    उत्तर देंहटाएं
  3. बिना समझे जिसने पढ़ा
    वह कभी न आगे बढ़ा

    उत्तर देंहटाएं
  4. हाइकू या त्रिपदी की तुलना में यह मुझे दुहत्थड़ जैसे लगा। बहुत रोचक।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर ....लाजवाब...
    मज़ा आ गया पढ़कर !
    हरदीप

    उत्तर देंहटाएं
  6. aap sab rachana premiyon ka tahe dil se abhaar..ki apne mrei chikotiyan pasand ki..fir se abhaar...

    उत्तर देंहटाएं

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