बुधवार, 29 सितंबर 2010

योगेन्‍द्र कुमार वर्मा के कुछ मुक्तक

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मुक्‍तक

त्‍यागकर स्‍वार्थ का छल भरा आवरण

तू दिखा तो सही प्‍यार का आचरण

शूल भी फिर नहीं दे सकेंगे चुभन

जब छुअन का बदल जाएगा व्‍याकरण

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सत्‍य को त्‍यागकर व्‍यक्‍ति जीवित नहीं

सत्‍य की राह में ग्‍लानि किंचित नहीं

झूठ बेशक परेशान करता रहे

पर कभी सत्‍य होता पराजित नहीं

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भोर बचपन लगी तो सुहानी लगी

दोपहर में जवानी दिवानी लगी

जब ढली साँझ मुख पर पड़ीं झुर्रियाँ

रात को मृत्‍यु ही राजरानी लगी

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द्वंद हर साँस का साँस के संग है

हो रही हर समय स्‍वयँ से जंग है

भूख - बेरोज़गारी चुभे दंश - सी

ज़िन्‍दगी का ये कैसा नया रंग है

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; 2 द्ध

मंद शीतल सुगंधित पवन का कथन

है निराला यहाँ रोशनी का चलन

जुगनुओं के नयन की थकन को नमन

हैं अधूरे सपन पर न कोई शिकन

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प्‍यार इतना न मुझसे जताया करो

बादलों को पता मत बताया करो

ये पवन भी चुगलखोर-सी हो गई

खुशबुओं को न यूँ ही उड़ाया करो

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दर्द की दास्‍ताँ क्‍या कहूँ क्‍या लिखूँ

बुझ रही हर शमा क्‍या कहूँ क्‍या लिखूँ

कर रहीं खुदकुशी नित नई कोंपलें

रो रहा आसमाँ क्‍या कहूँ क्‍या लिखूँ

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ज़िन्‍दगी को सुहानी कहें किस तरह

दर्द की हर कहानी कहें किस तरह

मौन साधे रही पुष्‍प की हर व्‍यथा

खुशबुओं की रवानी कहें किस तरह

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नाम ः योगेन्‍द्र कुमार वर्मा

साहित्‍यिक नाम ः व्‍योम'

पिता का नाम ः स्‍व0 श्री देवराज वर्मा

जन्‍मतिथि ः 09ण्‍09ण्‍1970

शिक्षा ः बी.कॉम.

सृजन ः गीत, ग़ज़ल, मुक्‍तक, दोहे, कहानी, संस्‍मरण आदि

कृति ः इस कोलाहल में (काव्‍य-संग्रह)

प्रकाशन ः प्रमुख राष्‍ट्रीय समाचार पत्रों, साहित्‍यिक पत्रिकाओं

तथा अनेक काव्‍य-संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन

प्रसारण ः आकाशवाणी रामपुर से अनेक बार कविता कार्यक्रम

प्रसारित

सम्‍प्रति ः लेखाकार (कृषि विभाग, 0प्र0)

विश्‍ोष ः संयोजक - साहित्‍यिक संस्‍था अक्षरा' , मुरादाबाद

सम्‍मान ः काव्‍य संग्रह इस कोलाहल में' के लिए भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास

लखनऊ द्वारा पं0 प्रताप नारायण मिश्र स्‍मृति सम्‍मान-2009'

पत्राचार एवं स्‍थायी पताः ।स्‍.49, सचिन स्‍वीट्‌स के पीछे, दीनदयाल नगर फेज़-प्रथम्‌,

काँठ रोड, मुरादाबाद-244001 (0प्र0)

ईमेल -  vyom70@yahoo.in

4 blogger-facebook:

  1. एक-एक मुक्तक दिल को छूने वाला

    उत्तर देंहटाएं
  2. द्वंद हर सांस का सांस के संग है, हो रही हर समय स्वयं से जंग है।
    ख़ूबसूरत पंक्ति, सारे मुक्तक दिल को झंझोड़ने वाले हैं। वर्मा जी मुबारक बाद के मुस्तहक़ हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. समय गबाही देने आएगा, आँसमा भी भाव मे रग लाएगा
    रेत पर सपनो का कब तक कारवाँ चल पाएगा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपने बहुत अच्छा लिखा

    उत्तर देंहटाएं

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