श्याम गुप्त की कुण्डलियाँ छंद

  

कृष्ण लीला तत्वार्थ...नाग नथैया...
            ( कुण्डलिया छंद )

कालिंदी का तीर औ, वंशी धुन की टेर,
गोप गोपिका मंडली नगर लगाती फेर |
नगर लगाती फेर,सभी को यह समझाती,
ग्राम नगर की सभी गन्दगी जल में जाती |
विष सम काला दूषित जल है यहाँ नदी का,
बना सहसफन  नाग कालिया, कालिदी का ||

यमुना तट पर श्याम ने,    बंशी दई   बजाय,
चहुँ दिशि मोहिनि फेरि कर, सब को लिया बुलाय |
सब को लिया बुलाय,  प्रदूषित यमुना भारी,
सभी करें श्रम दान, स्वच्छ हो नदिया सारी |
तोड़ किया विषहीन प्रदूषण नाग का नथुना ,
फेन फेन नाचे श्याम, स्वच्छ हो  झूमी यमुना ||

            ---डा श्याम गुप्त.

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1 टिप्पणी "श्याम गुप्त की कुण्डलियाँ छंद"

  1. कुन्डलियां अच्छी हैंं पर आज के दौर के हिसाब से कुछ शब्द क्लिष्ठ हैं । गुप्ता जी को बधाई।

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