शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री की कविता - अन्नदाता

annadata

अन्‍नदाता ही मोहताज दाने-दाने को

बुन्‍देलखण्‍ड के गांवों में

मरे हुए बच्‍चों के वियोग में

दूध से फटती छाती

मरे जाते अनजान व्‍यक्‍ति के

मुंह से लगाती औरत

भूख के खिलाफ हाथ उठाकर युद्ध लड़ रही हैं।

आँचल का दूध और आँखों का पानी

लिख रहा संवेदना की नयी कहानी

भूमण्‍डलीकरण के दौर में मानव

आधा पशु और आधा मनुष्‍य हो गए हैं

या आधे मशीन और आधे पशु हो गए है

जहाँ प्रशासन की गौमाताएं बिसुखी पड़ी हैं

लात मारती है और दूध नहीं देती हैं!

----

सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री

राजसदन-120/132 बेलदारीलेन, लालबाग, लखनऊ

मो0ः 9415508695

ःपरिचयः-

नाम ः सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री

जन्‍म स्‍थान ः ललितपुर (उ0प्र0)

जन्‍म तिथि ः 1 जुलाई 1966

शिक्षा ः बी.ए., फिल्‍म एप्रिशियेशन कोर्स

प्रकाशन ः कहानी, बालकहानी, बाल नाटक, व्‍यंग, कविताऐें तथा फीचर्स एवं राजनैतिक तथा सामाजिक रिपोर्ट ः-

धर्मयुग, नवनीत, मनोरमा, सुलभ इण्‍डिया, उत्‍तर प्रदेश मासिक, हैलो हिन्‍दुस्‍तान, लोकमाया, अभय छत्‍तीसगढ़, इतवारी पत्रिका, हिमप्रस्‍त, इस्‍पात भारती, सुगंध, प्रेरणा, प्रगति वार्ता, गुजंन, डायलोग इण्‍डिया, शुक्रवार, लोकायत, मध्‍यप्रदेश सन्‍देश, मड़ई, हरियाणा संवाद, प्रथम इम्‍पेक्‍ट, इण्‍डिया न्‍यूज, बुमेन अॉन टाप, प्रगति वार्ता, जागृति इण्‍डिया,विचारसारांश, सशर्त, मधुरिमा,

रचनाकार आदि पत्रिकाओं के साथ नवभारत टाइम्‍स, दैनिक भास्‍कर, दैनिक जागरण, दैनिक ट्रव्‍यून, पंजाब केसरी, नवज्‍योति, देश बन्‍धु, नवभारत, लोकमत, पूर्वाचंल प्रहरी, गांडीव, रांची एक्‍सप्रेस, प्रभात खबर, चौथी दुनिया, सन्‍डेमेल, महामेधा, आचरण, दैनिक कौसर, प्रातःकाल, श्री इण्‍डिया, जनप्रिय, शतरंग टाइम्‍स, सत्‍तासुधार आदि में प्रकाशन।

कृतियाँ ः उ0प्र0 सिनेमा से सरोकार

शीघ्र प्रकाशन ः अर्थ नहीं खोते शब्‍द काव्‍य संग्रह

पुरस्‍कार ः हंसवाहिनी पत्रकारिता पुरस्‍कार इलाहाबाद में

रामेश्‍वरम हिन्‍दी पत्रकारिता पुरस्‍कार 2007

सम्‍प्रति ः लखनऊ ब्‍यूरो प्रमुख, दैनिक भास्‍कर झांसी/ नोएडा।

सम्‍पर्क ः राजसदन 120/132 बेलदारी लेन, लालबाग, लखनऊ।

---

(चित्र साभार – सुरेन्द्र अग्निहोत्री)

2 blogger-facebook:

  1. बढ़िया ....
    एक बार हमें भी पढ़े -
    ( खुद को रम भगवन को भंग धतुरा ....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. जहां प्रशाशन की गौमाताएं बिसुधी पड़ी हैं। बहुत अच्छा चित्रण, सरकारी तंत्र का।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------