गुरुवार, 16 सितंबर 2010

रचना गौड़ ‘भारती' की लघुकथा – पराया सम्मोहन

पराया सम्‍मोहन' (लघुकथा)

हिन्‍दी भाषा पर शोध कर रहे प्रो. माणक अभी बिस्‍तर पर लेटे ही थे कि पास के घर से दो नारियों की व्‍यथा उनके कान में पड़ी। एक कह रही थी -‘‘ नारी होने का दुख उठा रही हूं , जिसे देखो पीछे पड़ जाता है जैसे उसकी अपनी जागीर हो ''

दूसरी -‘‘ हां यह सच है अपनी पत्‍नी में चाहे सब गुण मौजूद हों मगर भाती दूसरी ही है।''

पहली -‘‘ ये लोग यह नहीं समझते पराई स्‍त्री पराई ही रहेगी कभी इनकी हो नहीं पाएगी फिर भी मन, संतोष के लिए सिर मारते रहते हैं।

दूसरी -‘‘ कुछ लोगों की आदत होती है झूठन खाने की वह छूटती ही नहीं। दूसरे की थाली का व्‍यंजन सभी को अच्‍छा लगता है।

यह बात प्रो. माणक के दिमाग मथ गई , उन्‍हें क्‍लू मिल गया था , तुरंत लिखने बैठ गए। उन्‍हें सब जगह अपना ही विषय नज़र आता और हर बात विषयान्‍तर्गत। अतः उन्‍होंने हिन्‍दी भाषा व अंग्रेजी भाषा को धरवाली व बाहरवाली के रुप में ठाल लिया। अपने लेख में इन पंक्‍तियों पे जोर देकर लिखा ‘‘ हिन्‍दी (धरवाली) में स्‍फूर्ति है , तेजी है ,लचक है और फिर भी लोग अंग्रेजी (बाहरवाली) के दीवाने हैं। अंग्रेजी पराई है कभी अपनी नहीं हो सकती फिर भी माथा मारे जा रहे हैं।''

रचना गौड़ भारती'

(कवियत्री एंव स्‍वतंत्र लेखिका)

कार्यकारी सम्‍पादक‘‘जिन्‍दगी Live त्रैमासिक पत्रिका कोटा (राज.)

ए -178 , रिद्धि सिद्धि नगर ,कुन्‍हाड़ी , कोटा (राज.)324008

 email-racchu68@yahoo.com

9 blogger-facebook:

  1. हिन्‍दी (धरवाली) में स्‍फूर्ति है , तेजी है ,लचक है और फिर भी लोग अंग्रेजी (बाहरवाली) के दीवाने हैं। अंग्रेजी पराई है कभी अपनी नहीं हो सकती फिर भी माथा मारे जा रहे हैं।''
    वाह... कहानी को कहां से मोड़कर जोड़ा है..बहुत खूब

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  2. gaud ji bahut badhai ho aapako, aapane hindi ko ghavali aur angreji ko baharvali batakar ek karaara chanta maara hai un angrjon ke gulamom par jo hindustan men rah kar angreji men khate hain, angreji gana gun gunate hain, pairvi hindi ki karate hain bachchon ko angrji sikhate hain ! bahut khoob !

    उत्तर देंहटाएं
  3. पराया सम्मोहन निजता को महत्व नहीं देता..स्वर्ण मृग के पीछे राम को दौड़ाने के बाद माता सीता को इसका खूब एहसास हुआ..न जाने हम कब चेतेंगे!
    ..अच्छा संदेश।

    उत्तर देंहटाएं
  4. जितेन्द्र‘जौहर’ Jitendra Jauhar12:16 am

    रचना जी,
    प्रभावशाली व्यंग्य के लिए बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  5. रचना जी,

    "पराया सम्मोहन " एक सुन्दर कटाक्ष है,

    आप ने सही कहा है आपने ,

    कहावत है न घर की कि मुर्गी दाल बराबर और होटल की दाल मुर्गी जैसी महसूस होती है .यह आग्ल भाषा का सम्मोहन नहीं तो नहीं तो और क्या है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. Rachna ji
    aapki laghukatha sabhi tatvon se bharpoor hai. doosre ki thali ka vyanjan sabko accha lagta hai..Bahut khoob

    उत्तर देंहटाएं

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