शनिवार, 11 सितंबर 2010

हरेन्द्रसिंह रावत की रचनाएँ

युद्ध बनाम संग्राम

न खुद जीओ

न जीने दो पड़ोसी को, 

तुम चाहो न चाहो, 

लेकिन मुझे बंदूक दो,  

बंदूक गोले और बम, 

हाथ में गन, 

गाँवों में ग़रीबों को डराओ, 

सताओ, ज़रूरत पड़ने पर

मार गिराओ ! 

एक सैनिक दूसरे को मारता है, 

जिसको वह नहीं जानता है, 

केवल यह जानता है, 

इसके माता पिता हैं, 

पत्नी है बच्चे नादान कच्चे हैं, 

इसके मरने से वे बिछुड़ जाएँगे, 

फिर भी वह मारता है ! 

जो यह सब कराता है, 

पीछे बैठ कर ताली बजाता है, 

इसमें कोई न जीतता न हारता है, 

दोनों ही जन धन अपना गँवाता है ! 

चारों ओर बरबादी, रक्त ही रक्त नज़र आता है, 

भुखमरी अकाल, यम राज का महा जाल

देख देख मुस्कराता है काल,  

लड़ाकू देश सदियों पीछे चला जाता है ! 

यह युद्ध या महा संग्राम कहलाता है !! 

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शवों के ढेर से शहीदों ने पुकारा

भारत का ताज सिर पर कश्मीर है हमारा, अबके न ले सकें तो लेंगे जन्म दुबारा, 

फूलों की खुशबू से कुदरत थी मुस्कराती, झरनों के साथ नदियाँ संगीत स्वर मिलाती, 

आती थी अप्सराएँ पहने गले में माला, कहते चिनार के वृक्ष लेंगे जन्म दुबारा! 

फूलों की घाटियों से थे फूल मुस्कराते, दिल उनका उलझ जाता जो भी यहाँ थे आते! 

सूरज सुबह सबेरे इन पर्वतों पे आता, आगे का रास्ता तो वह भी भूल जाता ! 

आतंकियों ने आकर इस स्वर्ग को उजाड़ा, खुदा की इबारत को दुष्टों ने मसल डाला, 

शुभ्र स्वेत पर्वत भी खन्डर बन गए हैं, झरनों के स्वरों को ये दुष्ट लें गए हैं! 

नापाक दरिंदों ने जब जब करी लड़ाई, भारत के सैनिकों से हर बार मात खाई, 

मौत बन के वीरों ने शत्रुओं को संहारा, अब चलेंगे स्वर्ग को लेंगे जन्म दुबारा ! 

इन चोटियों पे चढ़ कर कही बार जीत पाई, गद्दीनशीन नेता ने जीती ज़मीन गवाईं! 

फिर भी शवों के ढेर से शहीदों ने पुकारा, अल विदा वतन को लेंगे जन्म दुबारा! 

पाक है पड़ोसी बम गोलियाँ चलाता, निर्दोष प्राणियों को धोखे से मार जाता, 

उनकी चिता की आग से उठती धधकती ज्वाला, इस पापी को मिटाने लेंगे जन्म दुबारा! 

लाखों कटे सिरों को धागे से जोड़ करके, काली के खप्पर को अपने लहू से भरके, 

जिंदगी की सांझ तक भी जै हिंद का था नारा, अबके न ले सके तो लेंगे जन्म दुबारा ! 

भारत का ताज सिर पर कश्मीर है हमारा, अबके न ले सके तो लेंगे जन्म दुबारा !

1 blogger-facebook:

  1. दिल से लिखी अच्छे भाव की रवानी लिये देश प्रेम की कविता के लिये
    रचनाकार को बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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