बुधवार, 8 सितंबर 2010

विजय वर्मा के कुछ त्रिपद

amitabh

सेनेरियो  
मन

याद आता है
कोई रह रह के
मन दहके.

भोर बेकल
दिन बदहवास
रात कुहके..

कितना सहूँ
देखें मैंने तो ,सब
सह- सह के

उमड़े प्रीत
भला किसी से  कब
कह-कह के.

किस अदा से
देखी तुने कि अब 
मन बहके.

किनारे पर 
रहो  मत ,देखो तो
जरा बह के.

विजय कुमार वर्मा.बोकारो  थर्मल डी एम् डी ३१/बी

नोट ;सेनेरियो हाइकु की तरह ५-७-५ अक्षरों की त्रिपदी है बस अध्यात्मिक ना होकर सांसारिक है..
--
v k verma
vijayvermavijay560@gmail.com

3 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------