विजय वर्मा के कुछ त्रिपद

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amitabh

सेनेरियो  
मन

याद आता है
कोई रह रह के
मन दहके.

भोर बेकल
दिन बदहवास
रात कुहके..

कितना सहूँ
देखें मैंने तो ,सब
सह- सह के

उमड़े प्रीत
भला किसी से  कब
कह-कह के.

किस अदा से
देखी तुने कि अब 
मन बहके.

किनारे पर 
रहो  मत ,देखो तो
जरा बह के.

विजय कुमार वर्मा.बोकारो  थर्मल डी एम् डी ३१/बी

नोट ;सेनेरियो हाइकु की तरह ५-७-५ अक्षरों की त्रिपदी है बस अध्यात्मिक ना होकर सांसारिक है..
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v k verma
vijayvermavijay560@gmail.com

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3 टिप्पणियाँ "विजय वर्मा के कुछ त्रिपद"

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