विजय वर्मा के हाइकु – जीवन मृत्यु

   हाइकु 
जीवन-मृत्यु 
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प्रत्येक क्षण 

जीवन का,है बोध 

का अवसर.

 

अनावृत हो

रहस्य नया,पढो 

मंत्र सस्वर .

 

रहो ना सिर्फ 

जी लेने में जीवन

छोड़ो असर.

 

कब चेतोगे?

आयी अब तो बस 

अंत-पहर

 

आपाधापी में 

बीता जीवन ,अब 

जरा ठहर.

 

मृत्यु को जानो

नहीं तो भटकोगे 

जीवन-भर. 

 

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नोट;हाइकु ५-७-५ अक्षरों की त्रिपदी है


v k verma
vijayvermavijay560@gmail.com

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