शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

विजय वर्मा के हाइकु – जीवन मृत्यु

   हाइकु 
जीवन-मृत्यु 
-- 

प्रत्येक क्षण 

जीवन का,है बोध 

का अवसर.

 

अनावृत हो

रहस्य नया,पढो 

मंत्र सस्वर .

 

रहो ना सिर्फ 

जी लेने में जीवन

छोड़ो असर.

 

कब चेतोगे?

आयी अब तो बस 

अंत-पहर

 

आपाधापी में 

बीता जीवन ,अब 

जरा ठहर.

 

मृत्यु को जानो

नहीं तो भटकोगे 

जीवन-भर. 

 

---

नोट;हाइकु ५-७-५ अक्षरों की त्रिपदी है


v k verma
vijayvermavijay560@gmail.com

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.