रविवार, 19 सितंबर 2010

राजेश विद्रोही की ग़ज़लें

ग़ज़ल

जिनके भीतर राज पुराने होते हैं।

घर घर में ऐसे तहखाने होते हैं॥

 

दुनियादारी,यारी,उल्‍फत अग़ियारी,

कैसे कैसे फर्ज निभाने होते हैं।

 

पहरा देते अज़गर जिनको छोड़ गये,

ऐसे भी बदबख्‍़त खजाने होते है।

 

आधी से ज्‍यादा खुदकुशियों के पीछे,

भाभी या ननदी के ताने होते है।

 

नई सदी में जीना है तो याद रहे,

हर युग के अपने पैमाने होते है।

 

उनको सच्‍चे झूठे से मतलब भी क्‍या,

जिनको बस इल्‍ज़ाम लगाने होते है।

 

कुछ अन्‍जाने यार भले ही मिल जाये,

दुश्‍मन सब जाने पहचाने होते हैं।

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ग़ज़ल

लहरों की रुनझुन गायब है सहमे हुए सिकारों से।

रह रह कर धुंआ उठता है अब भी सब्‍ज चिनारों से॥

 

रावी के तट पर लाशों की गंध हवा में तारी है।

लोहू के छींटे आते हैं झेलम के फ़व्‍वारों से॥

 

बिन मौसम फिर बर्फ़ गिरी है शाखों पर सन्नाटा है।

सर्द लहू कैसे टपकेगा, कटे हुए कुहसारों से॥

 

कोई क्‍या तो आस लगाये, क्‍या कोई उम्‍मीद करे।

गरियाते नेता निकले हैं संसद के गलियारों से॥

 

अग़र हो सके बचके रहना, बड़े बुजुर्ग बताते हैं।

राजनीति के नन्‍दन वन में काबिज रंगे सियारों से॥

 

जब से पंडित और बरहमन ने मालिक को बांट लिया।

मंदिर-मस्‍जिद अटे पड़े है मज़हब के हक़दारों से॥

 

मंदिर-मस्‍जिद के मसलों से कब तक मुक्त करा दोगे?

कोई तो ये पूछे आखिर कौमी खिदमतगारों से॥

 

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राजेश विद्रोही

लाडनूं नागौर

राजस्‍थान

8 blogger-facebook:

  1. रावी के तट पर लाशों की गंध हवा में तारी है।

    लोहू के छींटे आते हैं झेलम के फ़व्‍वारों से॥


    बिन मौसम फिर बर्फ़ गिरी है शाखों पर सन्नाटा है।

    सर्द लहू कैसे टपकेगा, कटे हुए कुहसारों से॥

    अच्छी पंक्तिया ........

    इसे भी पढ़कर कुछ कहे :-
    (आपने भी कभी तो जीवन में बनाये होंगे नियम ??)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_19.html

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  2. हालात का यथार्थपरक चित्र उकेरती अच्छी रचनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. पहली ग़ज़ल दिल को छू गयी दूसरी दिल के आर पार निकल गयी और हाँ

    "आधी से ज्‍यादा खुदकुशियों के पीछे,
    भाभी या ननदी के ताने होते है।"

    ये सूची थोड़ी लम्बी होनी चाहिए जाने कितने ही लोग कतार में अपने नाम के आने प्रतीक्षा कर रहे होंगे

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहतरीन गज़लें।

    आपकी पोस्ट आज के चर्चामंच का आकर्षण बनी है । चर्चामंच पर आकर अपने विचारों से अवगत करायें।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. उनको सच्‍चे झूठे से मतलब भी क्‍या/जिनको बस इल्‍ज़ाम लगाने होते है।
    बहुत गहरी बात है इस शेर में

    उत्तर देंहटाएं
  6. मफ़हूम कि द्रिष्टि से अच्छी रचनायें ,पर गज़ल की तकनीकि पक्छ में और बेहतरी की गुंजाइश है, "पंडित- बरहमन ने मालिक को बांट दिया" पडित और बरहमन का मतलब एक ही है, यहां एक जगह मौलवी या ईमाम का उल्लेख होता तो बेहतर होता।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी गज़लें ... शुक्रिया !!

    उत्तर देंहटाएं

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