शनिवार, 18 सितंबर 2010

राजीव श्रीवास्तव की कविता : तू क्यों चली गई माँ

 

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सूरज की पहली किरण से जैसे फूल खिलते है

तुम्हारा मर्म स्पर्श मुझे भी जागता था माँ

ओस की बूंदें जैसे पत्तों पर इतराती है

मैं भी तुम्हारे गोद मैं अठखेलियां करता था माँ

बादल जैसे सूरज को ढंक के देता है छांव

तुम्हारा आँचल भी मुझे सुकून दिलाता था माँ

बारिश की बूंदें जैसे प्यासी धरती की प्यास बुझाती है

तुम्हारी आँखों को देख मैं भी तर जाता था माँ

दूर बजती बांसुरी को सुन जैसे मूर नाचता है

तुम्हारी मधुर वाणी सुन ,मैं खिल उठता था माँ

सागर की लहरे जैसे सीप को किनारी पर लाती है

तुम्हारी उंगली पकड़ मैं भी मंज़िल पा जाता था माँ

पहाड़ जैसे पहरेदारी करते है सरहदों की

तेरे पीछे छुप मैं निश्चिंत हो जाता था माँ

तेरे बिना जी ना सकूँगा ये जानती थी ना

फिर मुझे अकेला छोड़ ---क्यों चली गई माँ

अब दिन पतझर जैसा लगता है ,और रात अमावस

तेरे बिन होली बेरंग और दीवाली अंधेरी है माँ

यदि नदी रूपी जीवन मैं हम किस्ती मैं सवार है

तो तू ही मांझी है तू ही पतवार है माँ

हे ईश्वर तू मेरा सब कुछ छीन ले

दे सके तो बस दे-दे मेरी माँ

--

rajeev shrivastava (Mobile)

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तव

मेरा परिचय

मैं पेशे से डॉक्टर हू और लगभग १४ सालों से मेडिकल कॉलेज मैं काम कर रहा हू. मुझे लिखने का शोक है .मैंने अब तक तीन पुस्तकें चिकित्सा से संबंधित लिखी है और मेरा एक नॉवेल भी छापने वाला है ,मैंने कई कविताएं लिखी है कई कविताएं पत्रिकाओं मैं प्रकाशित हो चुकी हैं ,मेरी ज्यादातर कविताएं हमारे आस-पास हो रही घटनाओं पर आधारित हैं ,मैं अपनी कविताओं के माध्यम से एक सरल भाषा में कुछ ज़रूरी विषयों पर लोगों की आंखें खोलना कहता ह़ूं और कोशिश करूँगा की हर कविता से कोई ना कोई संदेश दे सकू.

नाम-डॉक्टर राजीव श्रीवास्तव

पिता का नाम-श्री कैलाश नारायण श्रीवास्तव

उम्र- ४० साल

पेशा-डॉक्टर

पता- टाइप ४ क-५ मेडिकल कॉलेज कॅंपस

रामपुर रोड हल्द्वनि-नेनीताल

6 blogger-facebook:

  1. काफी गहरी संवेदनायें हैं.........

    उत्तर देंहटाएं
  2. bhavpoorna rachna ......bhavnaao ko ukerne me aap safal rahe......shubhakaamnaaye

    उत्तर देंहटाएं
  3. सचमुच माँ के बिना जीवन का हर रंग बेरंग और हर उजाला घोर अँधेरा ही लगता
    है...... बहत ही खूबसूरत रचना लिखी है आपने.......

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना ...पढ़कर भावुक हो गया मैं...

    उत्तर देंहटाएं
  5. मां के प्रति दिल की गहराईयों से कविता के माद्ध्यम से 'अक़ीदत" बिरले लोग ही पेश कर पाते हैं । रचनाकार को मुबारकबाद्।

    उत्तर देंहटाएं

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