शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

शशांक मिश्र ‘‘भारती'' की कविताएं

 

एक-

मेघ राज आये हैं

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गगन की गोद से

पहाड़ों की ओट से

मेघराज आये हैं,

गरमी दूर करने

धरा में नमी भरने

बादल जी भाये हैं,

किसान राह देखें

मोर भी बाट जोहें

बच्‍चों ने गीता गाये हैं,

मेंढक जी बोले

मछली जी तोले

जुगनू जगमगाये हैं,

झींगुर की झिक-झिक

कोई बोला टिक-टिक

मनभावन आये हैं,

बुँद जो गिरती हैं

टप टप करती है

चुनरी धरा की ले

हरिचंदन करने को

मेघराज आये हैं॥

(प्रकाशनः-देवसुधाः-2009 पृष्‍ठ-54 से साभार)

 

दो-

अधखिली कली

--------- शशांक मिश्र ‘‘भारती''

तू-

सो रही है अपने को

चिरनिद्रा में विलीन किये

न किसी के आने की चाह

और-

न ही जाने की आस

सिर्फ-

अपने में ही लीन विचरण कर रही है

स्‍वप्‍न लोक में।

कली-

तू अभी खिली नहीं है

लेकिन-

तेरी चिर निद्रा का अवसान होते ही

तेरी पंखुड़ियां खिल जाएंगी,

और-

बन जाएगी तू-

स्‍वप्‍न लोक से बाहर आकर

अपनी गहन निद्रा का त्‍याग कर

कली से पुष्‍प!

तेरे खिल जाने से

समीप आकर गुन-गुनाएंगे भौंरे

तेरा मकरन्‍द लेकर

अपनी क्षुधा मिटायेंगे,

और-

अपनी व्‍यथाओं की गाथा

तुझको-

मधुर स्‍वरों में सुनाएंगे।

तेरी सुगन्‍ध जब फैलेगी

अथक वायु के द्वारा

तब-

हर्षित हो उठेंगे

सभी जीव-जन्‍तु

तेरी निरुपम सुगन्‍ध से,

किन्‍तु-

हाय! नष्‍ट कर देगा तुझे

हवा का एक तीव्र झोंका

सभी विखर जाएंगे स्‍वप्‍न, आकांक्षाएं

और-

जीवन के मोहक उद्‌देश्‍य।

तू बिखर जायेगी

अपने को मारुत के तीव्र झोंकों को समर्पित कर

और-

अपनी कथा समाज व देश में अंकित कर,

तू-

छिन्‍न-भिन्‍न हो जायेगी

उसी की क्रूरता से

जिसके द्वारा फैलनी थी

तेरी सुगन्‍ध

चहुं ओर।

कवि की पुस्‍तकः- पर्यावरण की कविताएं माण्‍डवी प्रकाशन गाजियाबाद 2004 पृष्‍ठ 20-21 से,

2 blogger-facebook:

  1. अच्छी प्रस्तुति ..दोनों कविताएँ अच्छी लगीं ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रथम कविता बिल्कुल सपाट लगी विषय से चिपक कर चल रही है, बिम्बों के प्रयोग से ये और बेहतर हो सकती है, दूसरी कविता भाव प्रधान है और क़ाबिले- तारीफ़ है।

    उत्तर देंहटाएं

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