एस के पाण्डेय की कविता – गांधी का रामराज्य

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गाँधीजी का रामराज्य

(१)

सत्य-धर्म का राज्य जहाँ

वह रामराज्य भारत में आये ।

अमन-चैन हो सुख-समृद्धि

हर कोने में खुशियाँ छाये ।।

 

भूँखा न हो प्यासा कोई

सबको अपना अधिकार मिले ।

शुभ न्याय मिले ऐसा सबको

अपराधी व अपराध जले ।।

 

(२)

सत्य-अहिंसा, अमन-चैन हित

नैतिकता बहुत जरूरी है ।

धर्म बंधन के बिना सत्य से

बढ़ती जाती दूरी है ।।

 

गाँधीजी का कहना था

धार्मिक-रुझान जरूरी है ।

मानस-गीता का पाठ करो

अच्छी न इनसे दूरी है ।।

 

(३)

भारत का जन-जन गाँधीजी को

महात्मा गाँधी कहता है ।

उनके सत्य-अहिंसा का

डंका पीटा करता है ।

लेकिन यह कहना झूठ नहीं

उन्हें मानस ने संत बनाया था ।

 

उनके तीन बंदरों को भी

इसने ही ज्ञान सिखाया था ।।

जन-जन से हर भारतवासी से

प्रेम का पाठ लखाया था ।

रामराज्य का सपना भी गाँधी के मन-मस्तिक में

पावन मानस से आया था ।।

 

(४)

देश-समाज की स्थिति दिन-दिन

और बिगड़ती जाती है ।

शीलहरण, हिंसा, लूट-डकैती

रोज सुनने में आती है ।

 

शुरू से अपने बच्चों को

जो मानस पाठ पढाएं हम ।

अपने आप बहुत सीमा तक

समस्याएँ हो जाएँ कम ।।

 

स्कूलों और कालेजों में

जो मानस भी पढ़ी जायेगी ।

जन-जन से प्रेम, बड़ों को मान, सत्य-अहिंसा की शिक्षा से

क्या ‘निरपेक्ष’ छवी मिट जायेगी ?

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एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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