आरसी चौहान की कविता

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पहली नहीं थी वह

उसे नहीं मालूम था

सपनों और हकीकत की दुनिया

में फर्क

जब उसे फूलों की सेज से

उतारा गया था

बेरहमी से घसीटते हुए

वह समझती

उस यातना का नया रूप

कि

मुंह खुल चुका था छाता सा

और उसकी सांसें टंग चुकी थी

खूंटी पर

यातना के तहत

जिसके सारे दस्‍तावेज

जल चुके थे

और वह राख में खोज रही थी

अपनी बची हुई हडि्‌डयां

उस हवेली में बेखबर

यातना की शिकार

पहली नहीं थी वह।

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परिचय- नाम-आरसी चौहान जन्‍म तिथि-08 मार्च,1979 जन्‍म स्‍थान-चरौवाँ, बलिया, 0 प्र0 शिक्षा-परास्‍नातक-भूगोल एवं हिन्‍दी साहित्‍य पी0 जी0 डिप्‍लोमा-पत्रकारिता सृजन विधा-गीत, कविताएं, लेख एवं समीक्षा आदि प्रसारण-आकाशवाणी इलाहाबाद,गोरखपुर एवं नजीबाबाद से प्रकाशन-हिन्‍दुस्‍तान,आज,दैनिक जागरण,अमृत प्रभात,यूनाईटेड भारत,गांडीव,डेली न्‍यूज एक्‍टिविस्‍ट,अभिनव कदम,नया ज्ञानोदय,वागर्थ,कादम्‍बिनी,गुफ्तगू,तख्‍तोताज,अन्‍वेषी ,इतिहास बोध एवं विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाएं तथा बेब पत्रिकाओं में अन्‍य- 1-उत्‍तराखण्‍ड के विद्यालयी पाठ्‌य पुस्‍तकों की कक्षा-7 वीं एवं 8वीं के सामाजिक विज्ञान में लेखन कार्य 2- विद्यालयी पत्रिका- ‘‘प्रवाह' का संपादन सम्‍प्रति-प्रवक्‍ता-भूगोल,राजकीय इण्‍टर कालेज,गौमुख,टिहरी गढवाल,उत्‍तराखण्‍ड स्‍थाई संपर्क- चरौवाँ, बलिया, 0 प्र0 221718 ईमेल- chauhanarsi123@gmail.com

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2 टिप्पणियाँ "आरसी चौहान की कविता"

  1. एक मार्मिक और यथार्थ पूर्ण सुन्दर कविता के लिये रचनाकार को बधाई।

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