सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

मंजरी शुक्ल की कविता – कोई सागर याद आए तो मत रोना

manjari shukla (Custom)

कोई सागर याद आए तो मत रोना

बूंदे तो हैं प्यास बुझाने के लिए

सूरज के पीछे क्यों है भागता

दिया भी तो है टिमटिमाने के लिए

 

अंधी दौड़ मैं कहाँ दौड़ा जाता

घर भी तो है सुस्ताने के लिए

जब दुनिया दगा देगी ए दोस्त

माँ है ना लोरियां सुनाने के लिए

 

नमकीन आंसुओं को बहने दे

सरल रास्ता है दुःख भगाने के लिए

मंजिल उनको ही मिलती है

जो तैयार हैं ठोकरे खाने के लिए

 

चतुराई मत कर जीने के लिए

सच्चाई काफी है जीत जाने के लिए

मन गर साफ़ है तो हर

सूरत मैं खुदा बसता है

जरूरत नहीं हैं किसी

मस्जिद में जाने के लिए

---

जन्म: ३० मार्च, १९७७

स्थान: गोरखपुर , उत्तर प्रदेश

शिक्षा: प्राइमरी शिक्षा - सेंट मेरी स्कूल, धार और विदिशा, मध्य प्रदेश

माध्यमिक शिक्षा - ट्रिनिटी कॉन्वेंट स्कूल, विदिशा

स्नातक - बी.ए ,

स्नातकोतर - एम. ए .बी.ऐड.,पी. एच. डी(इंग्लिश), होशंगाबाद

रुचि: पुस्तकें,पेंटिंग,मूवी देखना

साहित्यिक गतिविधि- विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं  में कविताएँ एवं कहानिया प्रकाशित,दूरदर्शन मे बच्चो के कार्यक्रम एवं गीत लिखे I प्रेमचंद साहित्य समारोह २०१० मे "नमक का कर्ज " कहानी को प्रथम पुरस्कार 

manjarisblog.blogspot.com

meregeet-manjari.blogspot.com

संपर्क:

 

डॉ. मंजरी शुक्ल

श्री समीर शुक्ल

सेल्स ऑफिसर (एल.पी.जी.)

इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन

गोरखपुर ट्रेडिंग कंपनी

गोलघर

गोरखपुर (उ.प्र.)

पिन - २७३००१

6 blogger-facebook:

  1. चतुराई मत कर जीने के लिए
    सच्चाई काफी है जीत जाने के लिए

    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति. एकदम सीधी बात.

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी प्रस्तुति ....


    सूरत मैं खुदा बसता है

    जरूरत नहीं हैं किसी

    मैं कि जगह में कर लें

    उत्तर देंहटाएं
  3. ंनमकीन आंसुओं को बहने दे ,
    सरल रास्ता है दुख भगाने के लिये।

    सुन्दर भावपूर्ण पंक्ति के लिये बहुत बहुत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. चतुराई मत कर जीने के लिए

    सच्चाई काफी है जीत जाने के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  5. suraj ke peechhe kyon bhaagataa hai diya to hai timtimane ke liye,
    Very nice poem which goes and hits direct to heart.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सूरज के पीछे क्यों है भागता
    दिया भी तो है टिमटिमाने के लिए

    सुंदर अभिव्यक्ति, उत्तम रचना|

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------