शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

उदयकरण ‘सुमन’ की ग़ज़ल

 

वो कितने बेचारे होंगे

जीती बाजी हारे होंगे

 

खुद के सगा सहोदर ने भी

ताने पत्थर के मारे होंगे

 

माँ जाए भी ऐसे निर्मम

कमर तोड़ हत्यारे होंगे

 

नींद न होगी आँखों में जब

सपनों के बटवारे होंगे

 

भान नहीं था, डूबेंगे जब

बिल्कुल पास किनारे होंगे

 

सच को फिर सच कौन कहेगा

कलमगार जब हारे होंगे

 

रात जगेगी दिन सोचेगा

सुख के जब ‘सन्थाने’ होंगे

 

जो शिखरों में टूटे होंगे

पत्थर वो कुछ मारे होंगे

---

सुमन सेवा सदन, पो. रामसिंह नगर, जिला श्रीगंगानगर

--

(दिव्यालोक – अंक 14, वर्ष 2010 से साभार)

2 blogger-facebook:

  1. बहुत अच्छी रचना मुबारकबाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सच को फिर सच कौन कहेगा
    कलमगार जब हारे होंगे...
    kya baat hai..bahut gazab..badhaaee...

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------