प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌ का बाल गीत - मुनियाँ की बारात

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मुनियाँ की बारात 
हाथी, घोड़े, उल्लू तक थे मुनियाँ की बारात में
भालू ,बंदर , शेर उचकते मुनियाँ की बारात में।

शोर शराबा, ढोल ढमाका, आतिशबाजी फूट रही
नाच,नाच कोई न थकते मुनियाँ की बारात में।

 
कुत्ता,बिल्ली,चूहे,हाथी सभी झूमते मस्ती में
मेंढक भी भरपूर उचकते मुनियाँ की बारात में।

डी जे चीख रहा जोरों से सभी बाराती झूम रहे
बड़ा काफला रुकते रुकते मुनियाँ की बारात में।

हुल्लड़बाजी, धूम धड़ाका, सड़कों पर उत्पात किया
बचे बाराती पिटते पिटते मुनियाँ की बारात में।

मुनिया नामक चींटी थी जो चली ब्याहने चींटे को
सभी बराती नाचे मटके मुनियाँ की बारात में।

छोटे बड़े सभी शामिल थे उस छुटकी की शादी में
सबने किये काम मिल जुलकर मुनियाँ की बारात में।

 
पता नहीं इंसान आज के भेद भाव क्यों करते हैं
क्यों न वे शामिल हो जाते मुनियाँ की बारात में।

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

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