राजीव श्रीवास्तवा की हास्य व्यंग्य कविताएँ

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"नारी पे भारी पड़ गयी नारी"

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( इस रचना के मध्यम से मैं समाज के एक कड़वे सच को अपने मित्रों के साथ बाँटना चाहता हू ,और ज़रूर चाहूँगा की इस जटिल विषय पर अपनी बेबाक राय अवश्य दे)

पुरुष प्रधान देश में सब,

महिला की बताते हैं लाचारी,

पर इतिहास गवाह है की,

नारी पे भारी पड़ी है नारी!

 

सीतामाँ श्रीराम के साथ वन गयी,

दशरथ के दिल पे पड़ गया भारी,

कैकई ने स्वार्थ निकाला देखो,

नारी पे भारी पड़ गयी नारी!

 

द्रौपदी का चीर हरण हुआ,

सबके सामने उतारी गयी थी साड़ी,

गंधारी भी वही खड़ी थी ,देखो

नारी पे भारी पड़ गयी नारी!

 

आज बहुओं पे अन्याय होता,

बातें करती दुनिया सारी,

सास ही बहू को क्यों सताती,देखो

नारी पे भारी पड़ गयी नारी!

 

शादी में दहेज लेने में,

माँ की भी होती है हिस्सेदारी,

बिन दहेज बहू ना लाए ,देखो

नारी पे भरी पड़ गयी नारी!

 

किसी के हंसते -खेलते परिवार,

में जब दूसरी औरत लगा देती है चिंगारी,

गृहस्थी टूट के बिखर जाती,देखो

नारी पे भारी पड़ गयी नारी!

 

बेटी के पैदा होने पर,

बहू को देती है गारी,

तू भी तो एक औरत है ,देखो

नारी पे भारी पड़ गयी नारी!

 

बेटे की देती राज -पाठ,

बेटी को घर की जिम्मदारी,

बेटी से ही क्यों काम कराती ,देखो

नारी पे भारी पढ़ गयी नारी!

 

नारी ही नारी से ईर्षा करती,

कैसी है ये बीमारी,नारी का

संपूर्ण उत्थान ना होगा,जब तक

नारी पे भारी पड़ेगी नारी!

 

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थोड़ा अड्जस्ट करो ना यार

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जिंदगी के सफ़र में,

कुछ शब्दों का प्रयोग,

होता है बार बार,

उनमें से कुछ शब्द है,

"थोड़ा अड्जस्ट करो ना यार" !

 

भरी ट्रॅन में सीट फुल है,

पांव रखने की जगह नहीं,

आप किसी को खिसका कर बैठो,

और प्यार से बोलो,

"थोड़ा अड्जस्ट करो ना यार" !

 

आप ने घर पे पार्टी रखी,

लोग आ गये ज़्यादा,

घर वालों को कम परोसो,

और प्यार से बोलो,

"थोडा अड्जस्ट करो ना यार" !

 

महँगाई की मार पड़ रही,

सब कुछ महँगा हो गया,

दो की जगह एक सब्जी बनाओ,

और प्यार से बोलो,

"थोड़ा अड्जस्ट करो ना यार" !

 

नो पार्किंग पे गाड़ी खड़ी है,

ट्रैफ़िक वाला अकड़ रहा,

सॉरी बोलो या थमाओ चंदा,

और प्यार से बोलो,

"थोड़ा अड़जस्ट करो ना यार" !

 

कई महीनों से साड़ी माँगे,

धर्मपत्नी को गुस्सा आ गया,

अपना खाली पर्स दिखाओ,

और प्यार से बोलो,

"थोडा अड्जस्ट करो ना यार"!

 

अगर ये रचना पसंद आई,

तो प्यारे से कॉमेंट करो,

अगर कम पसंद आई है तो,

मैं प्यार से कहता हूँ ,

"थोड़ा अड्जस्ट करो ना यार"!

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rajeev shrivastava

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

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5 टिप्पणियाँ "राजीव श्रीवास्तवा की हास्य व्यंग्य कविताएँ"

  1. दोनो ही रचनायें बहुत ही सुन्दर ……………बाकी "थोड़ा अड्जस्ट करो ना यार"!

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  2. raajeev jee badhaaee, dono rachanaaen laajvaav ! hakikat hi hai jo javaan pe aa gaya,
    saas boli "bahu dahej lekar aana meri bholi gayya" !

    उत्तर देंहटाएं
  3. राजीव जी दोनो कविताएँ लीक से हट कर लगीं|

    जहाँ एक तरफ नारी पर भारी पड़ी नारी चिर काल के व्यथा-कथा को शब्दांकित करती हैं, वहीं 'थोडा अड्जस्ट करो ना यार' मौजूदा समय पर एक अच्छा हास्यात्मक व्यंग्य परोसती है| बधाई|

    http://thalebaithe.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर अर्थपूर्ण रचनायें

    उत्तर देंहटाएं

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