मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ की बाल कविता - पिकनिक

prabhudayal (Custom)

पिक‌निक‌

लालू, कालू मोहन,सोहन,
चलो वलें अब पिकनिक में|

लीला,शीला,कविता,रोशन,
चलो चलें अब पिकनिक में|

ले जायेंगे आलू बेसन,
चलो चलें अब पिकनिक में|

वहीं तलेंगे भजिये छुन छुन,
चलो चलें अब पिकनिक में|

चलकर् सीखेंगे योगासन,
चलो चलें अब पिकनिक‌ में|

योगासन पर होगा भाषण,
चलो चलें अब पिकनिक में|

प्रिंसिपल होंगे मंचासन,
चलो चलें अब पिकनिक में|

रखना है पूरा अनुशासन,
चलो चलें अब पिकनिक में|

गायेंगे सब बच्चे गायन,
चलो चलें अब पिकनिक में|
लाओ अपने अपने वाहन,
चलो चलें अब पिकनिक में|

मनमोहन मनभावन है दिन,
चलो चलें अब पिकनिक में|    

प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌

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  1. बाल कविता बिल्कुल बालकों के मन जैसी निश्चल और सरस है प्रभुदयाल जी| बधाई|

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