सोमवार, 18 अक्तूबर 2010

पूजा तोमर की कविताएँ

POOJA

1.****तमाशा****

आंखों ने ना देखी एक रात भी करार की

क्या कहानी सुनायें हम तेरे इन्तज़ार की

 

हर शय प्यासी है तेरे एक दीदार की

जन्नत से कम नहीं गली मेरे यार की

 

मेरी ज़िन्दगी का तमाशा ही बन गया

हद ना रही कोई मेरे एतबार की

 

तडपे है माहिया हम बे आब की तरह

हालत ना पूछ मुझसे दिले बेकरार की

 

फ़ुर्सत मिले ज़माने से तो कर लेना गौर

दिल में तेरे अवाज़ है बस मेरी पुकार की

 

कोई नहीं यहां "पूजा" कदरदान दिल का

कीमत लगाई जाती है दुनिया में प्यार की

 

 

2.****फ़ितरत****

अब नहीं कुछ उससे लेना-देना, हर कर्ज़ अदा कर चुके हैं हम

अब बचने की सूरत ही नहीं, कातिल को रकम अदा कर चुके हैं हम

 

अब कुछ नहीं पास बचा हमारे, सब निसार रहे वफ़ा कर चुके हैं हम

अब किस की राह तके बता दो, हर शख्स को खफ़ा कर चुके हैं हम

 

अब न होगी हमसे दोबारा यारों, एक बार जो खता कर चुके हैं हम

अब उसको इल्जाम क्या देना, उसकी फ़ितरत का पता कर चुके हैं हम

 

अब हो जायेगा जो होना है, हर बात का उससे गिला कर चुके हैं हम

अब क्या उम्मीद करें , चाहत का खतम सिलसिला कर चुके हैं हम

 

अब कुछ हासिल न होगा, यही सोचकर राह जुदा कर चुके हैं हम

अब नहीं कोई वास्ता, इस दुनिया से खुद को गुमशुदा कर चुके हैं हम

 

 

3.****सुबह-शाम****

मेरी कहानी अजीब है, खुद ही अपनी जंग में तमाम होती रही

सब रिश्ते टूट गए मगर फिर भी नजरों से दुआ सलाम होती रही

 

लगा कोई जनता नहीं, पर मेरी मोहब्बत सारे आम होती रही

उसकी अदा के जलवे तो देखो, सांसें भी उसकी गुलाम होती रही

 

वो तो चला गया पर उसकी यादों में सुबह-शाम होती रही

 

4.****मंजिल****

बहुत अजमा लिया वक़्त ने अब वक़्त अजमाने के दिन आ गए हैं

बहुत खाली ठोकरें हमने अब मंजिल को पाने के दिन आ गए हैं

 

बहुत सुन लिया और सह लिया अब सबको सुनाने के दिन आ गए हैं

अब सब कुछ सरेआम रख दो अब लुटने-लुटाने के दिन आ गए हैं

 

अब छोड़ दो रोना-रुलाना अब हंसने- हंसाने के दिन आ गए हैं

जो निगाहों से बदनाम करते थे उनसे नज़रें चुराने के दिन आ गए हैं

 

फिर से महकने लगी है फ़िज़ा अब चमन को सजाने के दिन आ गए हैं

चलो फिर से कही दिल लगाये अब दिल को लगाने के दिन आ गए हैं

 

 

5.****चाहत****

दिल चाहता है फिर से साथ मुस्कराये हम

सुलग-सुलग के बहुत गुजरी अब दिल जलाए हम

 

तेरे इन्तज़ार में जो राते कटी तेरे साथ बिताए हम

जो बात लबों से कह ना पाए आंखों से बताए हम

 

कुछ तुम अपनी कहो और कुछ अपनी सुनाए हम

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9 blogger-facebook:

  1. ज़न्नत से कम नहीं गली मेरे यार की।

    ख़ूबसूरत पंक्ति , अच्छी ग़ज़ल। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सारी कविताएं अच्छी है। सुंदर कविताओं की सुंदर अभिव्यक्ति।बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  3. aap sabka meri poems padne ke liye sukriya

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर लिखा है आपने ............मनमोहक

    उत्तर देंहटाएं
  5. pooja ji aapne bhut khubsurti se apne vicharon ko piroya hai.
    aapko bhut bhut shuvkamnayein
    Ekta Nahar

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेनामी12:16 pm

    Apki kavita mai kuch baat hai
    har ek shabdh main gahari baat hai

    Kamlesh Palia

    उत्तर देंहटाएं

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