मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

एकता नाहर की रचना - कुछ दर्द खामोश भी रहते हैं, हर एक दर्द दवा नहीं मांगता…

ekta nahar

सागर को प्यास लगती है,

तो दरिया से नहीं मांगता।

 

वृक्ष अगर गिरता है तो,

लता से सहारा नहीं मांगता।

 

हम गिरेंगे तो कौन सम्हालेगा हमें,

सूरज खुद ही तपता है, रोशनी नहीं मांगता।

 

कुछ दर्द खामोश भी रहते हैं,

हर एक दर्द दवा नहीं मांगता।

 

हम मांग भी लेते चांद से तुझको,

अगर चाँद तुझको हमसे नहीं मांगता।

 

EktaNahar5@gmail.com

16 blogger-facebook:

  1. bahut achchhi rachana.........badhai

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  2. कुछ दर्द खामोश भी रहते हैं,

    हर एक दर्द दवा नहीं मांगता।


    gr8 thoughts....

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  3. एकता जी, इस उम्र में आपकी साहित्य के लिए इतनी रूचि देखकर बहुत अच्छा लगा. कामयाबी आपके हाथों में है. बहुत सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  4. दर्द की राहों में इंसान बदल जाते हैं,
    बदलता नहीं सिर्फ प्यार ,
    प्यार करने वाले इंसान बदल जाते हैं...........

    उत्तर देंहटाएं
  5. samir singh12:00 am

    its realy mind blowing

    उत्तर देंहटाएं
  6. आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया,
    आप सभी ने मेरी रच्नाओ को सराहा, ये आपकी महानता है !
    आपके आशिर्वाद से भविश्य मे भी उन्नति करती रहू,
    ऐसी कामना है
    सादर
    एकता नाहर

    उत्तर देंहटाएं
  7. Dhanyawad ek baar firde aapko ektaji

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  8. हर इक दर्द दवा नहीं मांगता…। बहुत ही सुन्दर पक्ति
    अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूबसूरत रचना

    उत्तर देंहटाएं

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